ऑक्सीजन की खोज किसने की

ऑक्सीजन की खोज किसने की

ऑक्सीजन ऑक्सीजन के बारे में तो  हम सभी जानते हैं क्योंकि ऑक्सीजन के बिना हम साँस नहीं ले सकते और ऑक्सीजन सभी प्राणियों के लिए बहुत आवश्यक है ऑक्सीजन रंगहीन, स्वादहीन तथा गंधरहित गैस  है इसका रासायनिक सूत्र O है और इसको हिंदी में  प्राणवायु या जारक भी कहा जाता है इसको प्राणवायु इसीलिए करते हैं क्योंकि यह सभी प्राणियों के लिए सांस के लिए बहुत आवश्यक है वायु में क़रीब 2o.29% मात्रा ऑक्सीजन की होती है ऑक्सीजन पृथ्वी के अनेक पदार्थों में रहता हैजैसे पानी और वास्तव में अन्य तत्वों की तुलना में इसकी मात्रा सबसे अधिक है ऑक्सीजन को कई प्रकार से प्राप्त कर सकते है

जैसे कई प्रकार के आक्साइडों जैसे पारा, चाँदी आदि अथवा डाइआक्साइडों लेड, मैंगनीज़, बेरियम के तथा ऑक्सीजन वाले बहुत से लवणों जैसे पोटैशियम नाइट्रेट, क्लोरेट, परमैंगनेट तथा डाइक्रोमेट को गरम करने से ऑक्सीजन प्राप्त हो सकता है ऑक्सीजन का घनत्व 1.4290 ग्राम प्रति लीटर है और वायु की अपेक्षा यह गैस 1.10527 गुना भारी  होती है और ऑक्सीजन पानी में थोड़ा घुलनशील होती है

ऑक्सीजन की खोज

ऑक्सीजन गैस की खोज 1772 में  सर्वप्रथम स्वीडन के शीले नामक वैज्ञानिक ने की थी। ऑक्सीजन की खोज, प्राप्ति अथवा प्रारंभिक अध्ययन में जे. प्रीस्टले और सी.डब्ल्यू. शेले ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था  कार्ल शीले ने पोटैशियम नाइट्रेट को गर्म करके आक्सीजन गैस तैयार किया पर उनका कार्य बाद में उजागर हुआ एन्टोनी लैवोइजियर ने इस गैस के गुणों का वर्णन किया तथा इसका नाम आक्सीजन रखा, जिसका अर्थ है – ‘अम्ल उत्पादक’रखा था |

ऑक्सीजन के भौतिक गुण

  • ऑक्सीजन का क्वथनांक 183° सेंटीग्रेड तथा ठोस ऑक्सीजन का द्रवणांक 218.4° सेंटीग्रेड है। 15° सेंटीग्रेड पर संलग्न तथा वाष्पायन ऊष्माएँ क्रमानुसार 3.30 तथा 50.9 कैलोरी प्रति ग्राम है।
  • ऑक्सीजन पानी में थोड़ा घुलनशील है, जो जलीय प्राणियों के श्वसन के लिए उपयोगी है। कुछ धातुएँ जैसे- पिघली हुई चाँदी अथवा दूसरी वस्तुएँ जैसे- कोयला ऑक्सीजन का शोषण बड़ी मात्रा में कर लेती हैं।
  • ऑक्सीजन का विशिष्ट ताप 15° सेंटीग्रेड है तथा स्थिर आयतन के विशिष्ट ताप से इसका अनुपात 1.401 है।
  •  और ऑक्सीजन को  ठण्डा करने पर ऑक्सीजन नीले रंग के द्रव में परिवर्तित हो जाती है।
  • ऑक्सीजन गैस स्वयं नहीं जलती है, परन्तु  किसी चीज को जलने में सहायक होती है।

ऑक्सीजन के रासायनिक गुण

  • हवा से ऑक्सीजन अलग करने के लिए अब द्रव हवा का अत्यधिक उपयोग होता है, जिसके प्रभाजित आसवन से ऑक्सीजन प्राप्त किया जाता है, पानी के इलेक्ट्रॉलिसिस से हाइड्रोजन के उत्पादन में ऑक्सीजन भी बाइप्रॉडक्ट के रूप में मिलता है
  • ऑक्सीजन प्राप्त करने के विचार से कुछ अन्य ऑक्साइड भी जैसे ताँबा, पारा आदि के ऑक्साइड  इसी प्रकार उपयोगी हैं
  • बहुत से तत्व ऑक्सीजन से सीधा संयोग करते हैं। इनमें कुछ जैसे फॉस्फोरस, सोडियम इत्यादि तो साधारण ताप पर ही धीरे-धीरे क्रिया करते हैं, परंतु अधिकतर, जैसे कार्बन, गंधक, लोहा, मैग्नीशियम इत्यादि, गरम करने पर ऑक्सीजन से भरे बर्तन में ये वस्तुएँ दहकती हुई अवस्था में डालते ही जल उठती हैं और जलने से ऑक्साइड बनता है। ऑक्सीजन में हाइड्रोजन गैस जलती है तथा पानी बनता है। यह क्रिया इन दोनों के गैसीय मिश्रण में विद्युत चिनगारी से अथवा उत्प्रेरक की उपस्थिति में भी होती है।
  • जब बेरियम ऑक्साइड को गर्म  किया जाता है लगभग 500° सेंटीग्रेड तक तब वह हवा से ऑक्सीजन लेकर परॉक्साइड बनाता है। अधिक तापक्रम लगभग 800° सेंटीग्रेड पर इसके विघटन से ऑक्सीजन प्राप्त होता है तथा पुन: उपयोग के लिए बेरियम ऑक्साइड बचा रहता है। औद्योगिक उत्पादन के लिए ब्रिन विधि इसी क्रिया पर आधारित थी

ऑक्सीजन के उपयोग 

  •  सबसे बड़ा उपयोग जीवित प्राणियों के लिए ऑक्सीजन अति आवश्यक है इसे वे साँस द्वारा ग्रहण करते हैं और ऑक्सीजन को कृत्रिम साँस के रूप में प्रयोग करते हैं
  • किसी चीज को जलाने के लिए ऑक्सीजन अति आवश्यक है यह स्वय ऑक्सीजन गैस स्वयं नहीं जलती है |
  • ऑक्सीजन धातुओं को जोड़ने तथा क्लोरीन, सल्फ़्यूरिक अम्ल आदि के औद्योगिक निर्माण में प्रयोग की जाती है
  • ऑक्सीजन तथा दहनशील गैस को फुँकनी से जलाया जाता है  इस प्रकार उत्पन्न ज्वाला का ताप बहुत अधिक होता है की उस से लोहे की मोटी चद्दर काटी जा सकती है और मशीन के टूटे भागों को जोड़ा जा सकता है |
  • द्रव ऑक्सीजन तथा कार्बन, पेट्रोलियम का मिश्रण अति विस्फोटक है। इसलिए इनका उपयोग कड़ी वस्तुओं के तोड़ने के लिए किया जाता है |

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