सिक्के का अविष्कार किसने और कब किया

सिक्के का अविष्कार किसने और कब किया

Coin को तो हर कोई जानता  है क्योकि आज कोई पैसे कमाए या न कमाए है और Coin सभी के पास मिल जायेंगे Coin या सिक्का एक छोटा, फ्लैट, धातु या प्लास्टिक का टुकड़ा है जिसकी बनावट गोल चिपटी है और यह अक्सर सरकार द्वारा जारी किये जाते  हैं और यह किसी भी देश के अंदर चीजो का विनिमय करने के लिए काम आते है सिक्के किसी देश की मुद्रा का एक छोटा हिस्सा होता है और सिक्कों का इस्तेमाल रोजाना लेन-देन में पैसा के रूप में किया जाता है सिक्के आमतौर पर धातु या मिश्र धातु होते हैं, या कभी-कभी सिंथेटिक सामग्री से बने होते हैं लेकिन वे आम तौर पर डिस्क आकार के होते हैं मूल्यवान धातु से बने सिक्के बुलियन सिक्कों के रूप में बड़ी मात्रा में जमा हो जाती हैं।

आम तौर पर संचलन  में सबसे अधिक मूल्य का सिक्का सबसे कम मूल्य वाले नोट से कम कीमत का है पिछले सौ वर्षों में, प्रचलन के सिक्के का अंकित मूल्य जिस धातु से सिक्के बनाये जाते है उसके मूल्य से कम होते हैं   क्योंकि बाजार के अंदर मुद्रास्फ़ीति के कारण से सिक्कों की कीमत में गिरावट आती है और जिन जिन धातु से सिक्के बनाए जाते हैं उनकी कीमत ज्यादा हो जाती है

ऐतिहासिक रूप से, सिक्का धात्विक धातुओं (मिश्र धातुओं सहित) और अन्य सामग्रियों (जैसे चीनी मिट्टी के बरतन) का प्रचलन, संग्रह, और धातु निवेश के लिए और  सिक्कों का उत्पादन करने के लिए उपयोग किया जाता है: बुलियन सिक्का अक्सर अन्य की तुलना में आश्वासित धातु की मात्रा और पवित्रता के अधिक सुविधाजनक भंडार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है

सिक्कों का इतिहास

सबसे पहले सिक्के प्राचीन ग्रीस के क्यमे के डेमोदिके द्वारा बनाये गए थे, जिसने पेस्सिनस के राजा मिदास से शादी की थी और जिससे अगामेमनन नाम का एक पुत्र था  पहले  सिक्कों को लोहे आयु अनातोलिया और आर्चिक ग्रीस, भारत और चीन में 7 वें और 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास स्वतंत्र रूप से विकसित किया गया था और 6 वीं और 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व, ग्रीस और फारस में, और फिर आगे  सिक्के तेजी से फैल गए और शुरु में प्रारंभिक मध्ययुगीन सिक्के में उनकी धातु की सामग्री का मूल्य था जो धातु सिक्के में लगा है वही सिक्के की कीमत होती थी

लेकिन फ़ियाट पैसा यानि नोट के रूप में पैसे  पहले मध्ययुगीन चीन में पैदा हुआ था जियोओजी पेपर पैसे के साथ। प्रारंभिक पेपर पैसा यूरोप में बाद के मध्य युग में पेश किया गया था, लेकिन कुछ सिक्कों ने स्वर्ण या चांदी के महत्व को जारी रखा जो कि वे प्रारंभिक आधुनिक काल में समाहित थे सिक्का 17 वीं शताब्दी तक एक चांदी के सिक्के के रूप में ढाला गया था।

और संयुक्त राज्य अमेरिका के पहले सिक्के के सिक्के सेंट थे, जो 17 9 3 में बनाये थे और पूरी तरह से तांबे से बने थे संयुक्त राज्य अमेरिका इस मामले में बिल्कुल असामान्य है 1856 के बाद से एक-सेंट के सिक्के को बहुत कम बदला गया है हालांकि इसकी संरचना 1982 में बदल दी गई थी जब इस सिक्के से तांबे की मात्रा को पूरी तरह निकाल दिया गया था और यह अभी भी प्रचलन में है,  1 9वीं शताब्दी बिलियन का उपयोग कम हो गया और सिक्को में रजत सामग्री का इस्तेमाल कम किया जाना लगा और और मूल रूप से सस्ते धातु (जैसे निकल, कॉपरोनिकेल, एल्यूमीनियम कांस्य) की बनाई जाने वाले सिक्के बने लगे क्योकि सिक्को का मूल्य उनके धातु के मूल्य से अधिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते थे

भारतीय सिक्के

सिक्के ढालने का एकमात्र अधिकार भारत सरकार को है। सिक्का निर्माण का दायित्व समय-समय पर यथा संशोधित सिक्का निर्माण अधिनियम, 1906 के अनुसार भारत सरकार का है। विभिन्न मूल्यवर्ग के सिक्कों के अभिकल्प तैयार करने और उनकी ढलाई करने का दायित्व भी भारत सरकार का है। सिक्कों की ढलाई भारत सरकार के चार टकसालों यथा मुंबई, अलीपुर (कोलकाता), सैफाबाद (हैदराबाद), चेरियापल्ली (हैदराबाद) और नोयडा (उ.प्र.) में की जाती है भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के अनुसार परिचालन के लिए सिक्के भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से जारी किए जाते हैं।

और वर्तमान में भारत में सिक्के 10 पैसे, 20 पैसे, 25 पैसे, 50 पैसे, एक रूपए, दो रूपए पाँच रूपए और दस रुपये मूल्यवर्ग के जारी किए जाते हैं 50 पैसे तक के सिक्कों को छोटे सिक्के और एक रूपए तथा उससे अधिक के सिक्कों को रुपया सिक्का कहा जाता है। सिक्का निर्माण अधिनियम, 1906 के अनुसार 1000 रूपए मूल्यवर्ग तक के सिक्के जारी किए जा सकते हैं।

भारतीय सिक्को का प्रचलन शुरु और प्रचलन समाप्त कब हुआ

  • पहला रुपये का सिक्का सन ,1950 में ढाला गया था जब भारत सन , 1947 में आजाद हुआ था लेकिन ब्रिटिश सिक्के सन , 1950 तक देश में चलन में थे उसी समय में भारत में सिक्को का प्रचलन हुआ |
  • 1 रुपया 16 आना या 64 पैसे का मिलकर बनता था और 1 आना मतलब 4 पैसा होता था.सन , 1957 में भारत डेसिमल सिस्टम के तहत सिक्के ढलने लगे लेकिन कुछ समय तक डेसिमल और नॉन डेसिमल सिक्कों दोनो का ही देश में चलन था|
  • 1-2 आना  कुछ समय तक भारत में आना सिस्टम चला जिसमें 1 आना, 2 आना, 1/2 आना के सिक्के चलते थे. आना सीरीज या प्री-डेसिमल कॉइनेज के नाम से चर्चित इन सिक्कों में 1 आना, 2 आना, 1/2 आना के सिक्के चलन में थे|
  •  और रुपये की सबसे छोटी वैल्यू का सिक्का आधा पैसा को 1947 में आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया |
  • और बाद में  1 पैसा, 2 पैसा, 3 पैसा, 5 पैसा, 10 पैसा, 20 पैसा और 25 पैसा, 50 पैसा के सिक्के जारी किए जो देश में लंबे समय तक चलन में रहे |
  • और 1 पैसे का सिक्का सन ,1957-1972 के बीच चलन में थे और ढाले गए. इन्हें 2011 में डीमॉनेटाइज कर दिया गया यानी इन पर बैन लगा दिया गया|
  • सन 1957-1979 के बीच में 2 पैसा या आधा आना बनाये गए. साल 2011 में इन्हें भी चलन से बाहर कर दिया गया |
  • सन 1964-1972 के बीच 3  पैसा का सिक्का बनाया गया और साल 2011 में इन्हें बंद कर दिया गया|
  • सन 1957-1994 के बीच 5 पैसे का सिक्का बनाया गया और 2011 में इन्हें चलने से बैन कर दिया गया|
  • सन 1957-1998 के बीच 10 पैसे का सिक्का ढाला जाता रहा और इन्हें भी साल 2011 में चलने से बाहर कर दिया गया|
  • सन 1968-1994 के बीच 20 पैसा के सिक्के छपते रहे और 2011 में इन्हें बैन किया गया|
  • सन 1960 से लेकर आज तक 50 पैसे का सिक्का ढाला जा रहा है. हालांकि आधिकारिक तौर पर ये सिक्का चलन से बाहर नहीं किया गया है लेकिन आजकल शायद ही कोई 50 पैसे का सिक्का लेने के लिए राजी होता हो|
  • सन 1962 से 1 रुपया का सिक्का  चलन में आया ये सिक्का आज भी चलता है. हालांकि इसके अलग-अलग रूप सामने आते रहते हैं.
  • सन 1982 में 2 रुपये का सिक्का से चलन में आया और आज भी चल रहा है |
  • सन 1992 में 5 रुपये का सिक्का से चलन में आया और आज भी चल रहा है |
  • साल 2006 से सरकार ने 10 रुपये का सिक्का भी देश में जारी कर दिया |

यह भी देखे

इस पोस्ट में आपको सिक्कों का इतिहास भारत में सिक्कों का प्रचलन कब हुआ सिक्कों का अध्ययन पेट्रोल का आविष्कार किसने किया सोने के पुराने सिक्के बुक का आविष्कार किसने किया सिक्का बाजार प्राचीन भारतीय सिक्के  के बारे में बताया गया है अगर इसके अलावा आपका कोई भी सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करके जरूर पूछें. और इस पोस्ट को शेयर जरूर करें ताकि दूसरे भी इस जानकारी को जान सकें.

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