पनडुब्बी का आविष्कार किसने किया और कब किया

पनडुब्बी का आविष्कार किसने किया और कब किया

पनडुब्बी एक प्रकार का जलयान है जो पानी के अन्दर रहकर काम कर सकता है इसको सबमैरीन भी कहा जाता है यह पानी के नीचे और ऊपर दोनों तरफ चल सकती है पनडुब्बी का ज्यादातर इस्तेमाल समुंदर के नीचे होने वाली गतिविधियों का पता लगाने के लिए जल सेना द्वारा किया जाता है उसके अंदर बहुत दिनों तक पानी के नीचे रहा जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर उसे उतराकर ऊपर सतह पर ला सकता है और जरुरत पड़ने पर बहुत दिनों तक पानी के अंदर भी रखी जा सकती है पनडुब्बी के अंदर सभी पारदर्शी लगे होते हैं जिससे इसके अंदर बैठे हुए समुंदर के नीचे सब कुछ देख सकते हैं

और बहुत ही आधुनिक तरीके के उपकरण लगे होते हैं जिससे समुद्र के ऊपर के दृश्य भी देख सकते हैंपनडुब्बी डीजल इंजन और विद्युत मोटर के द्वारा जल के अंदर चलती है और परमाणु शक्ति के विकसित हो जाने के कारण अब इसके परिचालन में नाभिकीय रिऐक्टरों का उपयोग होने लगा है और ये किसी भी देश की नौसेना का विशिष्ट हथियार बन गई हैं  क्योकि  यह पानी के भीतर रहते हुए समस्त सैनिक कार्य करने में सक्षम है और ये  शत्रु के जलयानों पर टारपीडो से आक्रमण करने के लिये इसका उपयोग किया जाता है कुछ पनडुब्बियों पर 12 इंच की तोप और एक हवाई जहाज रखने की भी व्यवस्था होती है।

पनडुब्बी के अंदर जीवन के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं  कृत्रिम रुप से उपलब्ध होती है जैसे सांस लेने के लिए कृत्रिम ऑक्सीजन टंकी और कार्बन-डाई-ऑक्साइड ना भर जाए इसलिए कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित उपकरण भी लगे होते हैं लगभग जीवन के लिए उपयोगी सभी सुविधाएं पनडुब्बी के अंदर  उपलब्ध होती है क्योंकि पनडुबी को कई कई महीने तक पानी के नीचे रखना पड़ता है |

पनडुब्बी का आविष्कार

विश्व की पहली पनडुब्बी एक डच वैज्ञानिक द्वारा सन 1602 मैं बनाई गई थी  किंतु उस समय इसे युद्धोपकरण के रूप में नहीं सोचा गया था और कॉरनेलिउस फॉन ड्रिबेल (Cornelius Van Drebell) नामक हालैंडवासी ने  उस पनडुब्बी में सुधार की गई और उसे और गतिशील बनाया गया और उस पनडुब्बी लकड़ी की बनी थी और इसपर चमड़ा मढ़ा था। इसके अगल बगल दो चप्पू लगे थे, जो इसको डूबाते और उतराते थे।

और पहली सैनिक पनडुब्बी टर्टल सन ; 1775 में बनाई गई  इसका  प्रशिक्षण सफलता से हो गया और यह पानी के अंदर सभी सैनिक कार्य करने में सक्षम थी इसलिए इसका  इस्तेमाल 1 वर्ष बाद अमेरिकी क्रांति में किया गया और परिदर्शी के आविष्कार ने पानी में रहते हुए भी, इसे पानी के बाहर देखने की सुविधा प्रदान की इस प्रकार पनडुब्बी नौसेनिक युद्धों में भाग लेने योग्य बन गई।

और सन 1620 से लेकर अब तक पनडुब्बियों की तकनीक और निर्माण में बहुत बदलाव आया शुरुआत में डीजल इंजन से चलने वाले पनडुब्बियों  का इस्तेमाल किया जाता था  लेकिन समय के साथ-साथ इसके अंदर बदलाव किए गए और सन ,1950 में परमाणु शक्ति से चलने वाली पनडुब्बियों ने डीज़ल से चलने वाली  पनडुब्बियों का स्थान ले लिया।

परमाणवीय ऊर्जा के विकास ने पनडुब्बी के परिचालन में क्रांति कर दी है। अब पनडुब्बी को चलाने के लिये वायु की आवश्यकता नहीं रही है। अत: सतह पर बार बार आने की भी आवश्यकता नहीं रह गई है। नॉटिलस (Nautilus) पहली पनडुब्बी है, जिसमें शक्ति प्राप्त करने के लिये नाभिकीय रिऐक्टर का उपयोग किया गया है और नाभिकीय पनडुब्बी में न तो वायु की आवश्यकता पड़ती है और न ईधंन गैसों के निकास की समस्या ही रहती है

नाभिकीय पनडुब्बी के अंदर पुरानी पनडुब्बी के मुकाबले अधिक खाली स्थान होता है क्योंकि इसके अंदर केवल नाभिकीय रिएक्टर ही होते हैं और परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बी के जितने फायदे हैं उतना नुकसान भी है क्योंकि रिएक्टर बहुत ही ज्यादा खतरनाक किरण छोड़ते हैं कि इसके कारण मनुष्य का दुर्घटनाग्रस्त होना लगभग असंभव होता है।

और आज  समुद्री जल से आक्सीजन ग्रहण करने वाली पनडुब्बियों का भी निर्माण कर लिया गया  इन दो महत्वपूर्ण आविष्कारों से पनडुब्बी निर्माण क्षेत्र में क्रांति सी आ गई क्योकि आधुनिक पनडुब्बियाँ कई सप्ताह या महिनों तक पानी के भीतर रहने में सक्षम हो गई है।

और आज पनडुब्बियों का इस्तेमाल पर्यटकों  द्वारा भी किया जाता है वह समुद्री जीव को देखने के लिए पनडुब्बियों का इस्तेमाल करते हैं और हर विकसित देश के नौसेना  के बेड़े के अंदर पनडुब्बियों को शामिल किया जा रहा है क्योंकि देशों के बीच होने वाले टकराव से समुंदरी सीमा की सुरक्षा के लिए पनडुब्बियों का इस्तेमाल जरूरी हो गया है

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