Answer for जंगल, वायु, मृदा और जलीय स्रोत की गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करते हैं ?

जंगलों की भूमि तथा वर्षा में गहरा संबंध है। यदि वृक्षों को काटने की दर उनकी वृधि से अधिक हो जाए तो वृक्षों की संख्या कम होती जाती है और वह क्षेत्र धीरे-धीरे रेगिस्तान भी बन सकता है। जंगल सदा वायु, मृदा और जलीय स्रोत को सीधा प्रभावित करते हैं।
वृक्ष वाष्पण क्रिया से बड़ी मात्रा में जल मुक्त करते हैं। इस मुक्त जल से वाष्प-बादल बनते हैं तथा वर्षा होती है। जंगलों के कम होने से वर्षा भी कम होगी तथा उस क्षेत्र में वृक्ष उगने की दर कम हो जाएगी जिससे पर्यावरण प्रभावित होगा। | वृक्षों के बहुत अधिक काटने से जैव पदार्थों में समृद्ध मृदा की सबसे ऊपर की सतह वर्षा के पानी के साथ बहकर लुप्त हो जाएगी। मृदा के इस प्रकार अपरदन के कारण भूमि की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो जाती है। वन जंगली-जंतुओं को आश्रय देते हैं। हमें उनसे कई प्रकार की जड़ी-बूटियां मिलती हैं तथा इमारती लकड़ी प्राप्त होती है। कई उद्योगों के लिए हमें कच्चा माल प्रदान करते हैं। जंगलों से जलीय स्रोतों की गुणवत्ता बढ़ती है। इनसे भूमि कटाव पर नियंत्रण होता है।
जंगलों की उपयोगिता को देखते हुए वनों का पुनः पूरण अति आवश्यक हो जाता है। इन सबके अतिरिक्त पौधे जितने अधिक उगाए जाएंगे हमारा पर्यावरण उतना ही स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक होगा। पौधे ही हमारे प्रदूषित पर्यावरण को स्वच्छ कर सकते हैं। हवा, मृदा और जलीय स्रोत जंगलों से सीधे तौर पर संबंधित है।