हर्निया रोग के कारण लक्षण व उपचार

हर्निया रोग के कारण लक्षण व उपचार

मानव शरीर एक मशीन की तरह है जो कि 24 घंटे काम करता रहता है इसलिए हमारे शरीर में मशीन की तरह ही समय-समय पर दिक्कत आती रहती है जिनको हम बीमारियों के रूप में जानते हैं जिस तरह से हम समय-समय पर मशीन की रिपेयरिंग करवाते हैं उसी तरह से हमें समय-समय पर अपने शरीर की जांच व टेस्ट आदि करवाना बहुत जरूरी होता है.

क्योंकि अगर हम हमारे शरीर के ऊपर ज्यादा ध्यान नहीं देते और लगातार कठोर कार्य करते रहते हैं तब हमारे शरीर में कई बार कुछ ऐसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है जो कि हमें बहुत परेशानी देती है इसी तरह से हर्निया भी एक ऐसी समस्या है जिससे रोगी को बहुत ज्यादा परेशानी देती है और इससे रोगी को असहनीय पीड़ा होती है तो आज किस ब्लॉग में हम हर्निया रोग के कारण लक्षण व उपचार आदि के बारे में बताएंगे.

हर्निया क्या है

वैसे तो हर्निया रोग के बारे में अलग-अलग तर्क दिए जाते हैं लेकिन अगर इसमें अगर लेकिन अगर इस बीमारी को आसान भाषा में समझा जाए तो जब किसी इंसान के आमाशय से कोई भी मांसपेशी या उत्तक में छेद से अंदर का अंग उभर कर बाहर आने लगता है.

तब इसको हर्निया रोग कहा जाता है और हर्निया रोग ज्यादातर बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं में उत्पन्न होता है लेकिन कई बार यह नॉर्मल इंसानों में भी उत्पन्न हो जाता है यह रोग मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है जिसको स्लाइडिंग वैरायटी, रोलिंग वैरायटी, संयुक्त (मिक्सड) वैराइटी औरहाइएटल हर्निया रोग के नाम से जाना जाता है इन सभी के उत्पन्न होने के अलग-अलग कारण अलग-अलग लक्षण होते हैं

हर्निया रोग के कारण

ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं हो सकता कि किसी बीमारी का कोई कारण ना हो शरीर में किसी भी बीमारी के उत्पन्न होने के पीछे कोई ना कोई कारण जरूर होता है तो इसी तरह से इस बीमारी के भी कई मुख्य कारण है जैसे कई लोगों में हर्निया जन्मजात भी हो सकता है या पेट का कमजोर होना, पेट में अधिक दबाव पड़ना,

छोटी ग्रासनली, मांसपेशियों की कमजोरी होना, ज्यादा भारी वजन उठाना, ज्यादा कठोर कार्य करना, कब्ज की समस्या उत्पन्न होना, व्यायाम/परिश्रम का अभाव, रोगी कोई पेट पर गहरी चोट लगना या सर्जरी के दौरान घाव रहना,पेट में दर्द या जलोदर की समस्या उत्पन्न होना, रोगी का वजन अचानक बढ़ने लगना, लगातार खांसी व छींक आना, रोगी का ज्यादा शराब व नशीली वस्तुओं का सेवन करना आदि कई प्रकार के कारण होते हैं

हर्निया रोग के लक्षण

जब किसी इंसान के शरीर में हर्निया रोग उत्पन्न होता है तब इसके कई लक्षण भी देखने को मिलते हैं जैसे रोगी को पेट के निचले हिस्से में बहुत तेज पीड़ा होना, पीड़ा एकदम से शुरू होना व एकदम से कम होना, रोगी की ग्रास नली में वमन या खून की समस्या दिखाई देना, रोगी के पेट के नीचे दर्द वाली जगह पर गांठ बनना, रोगी की छाती में जलन होना,

रोगी का भोजन करने के तुरंत बाद लेटने पर दर्द होना, शुरू में रोगी को बेचैनी व भारीपन महसूस होना, रोगी की भूख प्यास कम होना, रोगी को थकावट का एहसास होना, रोगी की निंद्रा अवस्था से आंखें खुलना, रोगी की कमर या बाएं कंधे की तरफ दर्द फैलना, गर्म चीजों के सेवन से दर्द बढ़ना, इसके अलावा भी इस समस्या के अंदर कई प्रकार के लक्षण देखने को मिल सकते हैं

हर्निया पर नियंत्रण

अगर आपको लगता है कि आपके शरीर में हर्निया रोग की समस्या उत्पन्न हो सकती है तब आप इसको नियंत्रित करने के लिए कुछ ऐसी बातों का ख्याल रख सकते हैं जिनसे आपको इस रोग से बचने में मदद मिलती है जैसे

  • रोगी को अपने वजन को कम रखना चाहिए वह भारी वजन उठाने से बचना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा कठोर काम नहीं करना चाहिए
  • रोगी को शराब, बीड़ी, सिगरेट तंबाकू आदि के सेवन से बचना चाहिए
  • रोगी को भूख से ज्यादा भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को समय-समय पर अपने मल को त्याग देना चाहिए
  • रोगी को अपने शरीर में कब्ज़ की समस्या बिल्कुल भी उत्पन्न नहीं होने देनी चाहिए
  • रोगी को खांसी होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए
  • रोगी को लक्षण दिखाई देते ही तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा गलत आहार-विहार नहीं करना चाहिए
  • रोगी को चोट लगने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए

उपचार

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि अगर किसी इंसान के शरीर में हर्निया रोग की समस्या उत्पन्न हो जाती है तब उसको सर्जरी करवानी होगी क्योंकि इस समस्या को आप दवाइयों या अपने दैनिक जीवन की आदतों में बदलाव करके भी ठीक कर सकते हैं लेकिन इससे आपका हर्निया हमेशा के लिए बिल्कुल ठीक नहीं रहेगा कभी न कभी यह आपको फिर से हो सकता है लेकिन इसकी जांच डॉक्टर करते हैं कि आपको सर्जरी की जरूरत है या आपको दवाइयों के द्वारा ही ठीक किया जा सकता है लेकिन ज्यादातर लोगों में हर्निया उत्पन्न होने पर सर्जरी ही एकमात्र उपाय होता है

लेकिन हर्निया रोग उत्पन्न होने पर सर्जरी भी दो प्रकार से की जाती है अगर रोगी को इतना ज्यादा दर्द नहीं है और हर्निया का साइज छोटा है तब रोगी को लेप्रोस्कॉपी सर्जरी की जाती है जिससे रोगी को एक बिल्कुल छोटे उपकरण के साथ सर्जरी कर दी जाती है इससे रोगी कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है लेकिन अगर रोगी के शरीर में ज्यादा दिक्कत है और रोगी उससे बहुत ज्यादा परेशान है तब उसको ओपन सर्जरी की जरूरत होती है जिससे रोगी के ठीक होकर चलने फिरने में लगभग 6 महीने तक का भी समय लग सकता है

लेकिन फिर भी अगर किसी इंसान के शरीर में हर्निया रोग उत्पन्न हो जाता है तब उसको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और जल्दी से जल्दी अपने टेस्ट आदि करवाकर दवाइयां या सर्जरी आदि करवानी चाहिए क्योंकि अगर आप इस रोग का समय पर इलाज नहीं करवाते हैं तो धीरे-धीरे या रोग शरीर में बढ़ता जाता है और इससे आपको और भी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

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