पेट कैंसर के कारण लक्षण व उपचार

पेट कैंसर के कारण लक्षण व उपचार

वैसे तो दुनिया भर में बहुत सारी खतरनाक बीमारियां फैली हुई है लेकिन कुछ ऐसी बीमारियां होती है जिससे रोगी का बचना नामुमकिन होता है अगर एक बार इन बीमारियों से रोगी ग्रस्त हो जाता है तब इससे रोगी की मृत्यु होना निश्चित है ऐसा नहीं है कि इन बीमारियों का इलाज संभव नहीं है लेकिन इन बीमारियों का इलाज करवाना आम लोगों के बस में नहीं होता क्योंकि इनका खर्चा बहुत ज्यादा होता है.

इसी तरह से एक खतरनाक बीमारी का नाम कैंसर भी है जिससे हर साल लाखों लोग अपनी जान गवा देते हैं और यह एक ऐसा रोग है जो कि शरीर के अलग-अलग भागों में अलग-अलग प्रकार से उत्पन्न होता है तो आज के इस ब्लॉग में हम आमाशय के कैंसर के बारे में बातें करने जा रहे हैं इस ब्लॉग में हम बताएंगे कि आमाशय में कैंसर कैसे उत्पन्न होता है इसके कौन-कौन से लक्षण व कारण दिखाई देते होते हैं.

आमाशय का कैंसर

वैसे तो कैंसर एक ऐसा रोग है जो कि रोगी के शरीर में कहीं पर भी उत्पन्न हो सकता है और यह अलग-अलग प्रकार का होता है लेकिन जब किसी इंसान के पेट में कैंसर या ट्यूमर हो जाता है और वह रोगी के आमाशय की कोशिकाओं को नष्ट करता है तब इसको आमाशय कैंसर कहा जाता है और यह ज्यादातर 40 से 50 वर्ष की आयु वाले महिला या पुरुष में उत्पन्न होता है जब किसी रोगी को आमाशय का कैंसर हो जाता है.

तब इससे रोगी के शरीर में बहुत पीड़ा होती है और इससे रोगी बिल्कुल दुबला पतला वे कमजोर हो जाता है और इससे रोगी का आमाशय बिल्कुल कमजोर हो जाता है और वह कार्य करना बंद कर देता है और कैंसर एक ऐसा रोग है जो कि एक बार लगने पर बढ़ता ही जाता है इस पर कंट्रोल पाना बिल्कुल नामुमकिन होता है हालांकि इस रोग का इलाज संभव तो है लेकिन इसका इलाज बहुत महंगा है जिससे आम लोग इसका इलाज नहीं करवा पाते

आमाशय कैंसर के कारण

अगर आमाशय के कैंसर के कारणों के बारे में बात की जाए तो वैसे तो इंसान के शरीर में कैंसर उत्पन्न होने के बहुत सारे कारण होते हैं लेकिन इन के कुछ मुख्य कारण हैं जैसे ज्यादा शराब, तंबाकू, बीड़ी, गुटका, खैनी आदि का सेवन करना और ज्यादा तली भुनी हुई चीजों का सेवन करना ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन करना,

पेट के ऊपर गहरी चोट लगना, रोगी के शरीर में किसी भी तरह का इन्फेक्शन होना, रोगी का ज्यादा गंदे इलाके में काम करना, रोगी का ज्यादा समय धुएँ वाली जगह पर काम करना, रोगी का ज्यादा मांस मिट्टी आदि का सेवन करना गंदे भोजन का सेवन करना, गंदे वह दूषित पानी का सेवन करना,ज्यादा गर्म पदार्थों का सेवन, ज्यादा समय तक किसी खतरनाक बीमारी से ग्रस्त रहना इसके अलावा भी इस रोग के उत्पन्न होने के बहुत सारे कारण हो सकते हैं

पेट कैंसर के लक्षण

जब किसी इंसान के शरीर में आमाशय का कैंसर उत्पन्न हो जाता है तब इसके रोगी के अंदर कई लक्षण भी देखने को मिलते हैं जैसे रोगी के आमाशय में दर्द महसूस होना, रोगी को चक्कर आना, रोगी को दबाव महसूस होना, रोगी की दिल की धड़कन कम या ज्यादा होना, रोगी में खून की कमी होना, रोगी के शरीर का वजन घट जाना, रोगी के आमाशय से खून निकलना, रोगी का मन चिड़चिड़ा गुस्सैल होना, रोगी को थकान व कमजोरी होना, रोगी के बाल सफेद हो जाना या बाल झड़ जाना इसके अलावा भी पेट के कैंसर उत्पन्न होने पर बहुत सारे लक्षण दिखाई देते हैं.

क्या करना चाहिए

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि आमाशय के कैंसर को रोका नहीं जा सकता लेकिन इसके लिए आपको कुछ ऐसी बातों का ध्यान रखना होगा जिनसे आपकी समस्या को बढ़ने से रोक सकते हैं

  • आपको हर रोज सुबह खुली हवा में घूमना चाहिए
  • आपको नमकीन और स्मोक्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए
  • आपको अधिक फलों और सब्जियां का सेवन करना चाहिए
  • आपको नियमित व्यायाम करना चाहिए यह पेट कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करता है

क्या नहीं करना चाहिए

  • रोगी को शराब, तंबाकू, बीड़ी, गुटका, खैनी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को दूषित पानी व दूषित भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को भोजन के बाद व्यायाम नहीं करने चाहिए
  • रोगी को ज्यादा ठुस-ठुस कर भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को लक्षण दिखाई देते ही देरी नहीं करनी चाहिए

उपचार

जब किसी इंसान को आमाशय का कैंसर हो सकता है तब उसको इससे छुटकारा दिलाने के लिए अलग-अलग प्रकार के उपचार दिए जाते हैं उनमें से कुछ नॉर्मल होते हैं और कुछ ऐसे उपचार होते हैं जोकि डॉक्टरों के द्वारा दिए जाते हैं जैसे

  • अगर कोई रोगी अपने पेट की कैंसर को लेकर मानसिक रूप से तनाव में रहता है तब उसको मानसिक उपचार दिए जाते हैं जिससे रोगी को संतुष्ट किया जाता है कि वह इस रोग से छुटकारा पा लेगा और वे जल्द ही ठीक हो जाएगा
  • रोगी को अगर किसी इंसान के आमाशय में कैंसर से बहुत तेज दर्द हो रहा है तब उसको एक्युपंचर थेरेपी देकर मस्तिष्क को दर्द की संवेदना कम की जाती है

लेकिन फिर भी अगर किसी इंसान के शरीर में यह समस्या उत्पन्न हो जाती है तब उसको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और अपने टेस्ट आदि करवा कर अच्छा इलाज करवाना चाहिए क्योंकि यह खतरनाक जानलेवा बीमारी है इससे छुटकारा पाना बहुत मुश्किल होता है.

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