खूनी दस्त होने के कारण लक्षण व आयुर्वेदिक उपचार

खूनी दस्त होने के कारण लक्षण व आयुर्वेदिक उपचार

कई बार हमारे शरीर में ऐसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं जिन से छुटकारा पाना बहुत मुश्किल होता है और एक बार यह समस्या ठीक होने पर दोबारा फिर से उत्पन्न होने लगती है और बार-बार इन समस्याओं के उत्पन्न होने से हमारे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और हमारा शरीर बिल्कुल दुबला पतला हो जाता है तो इसी तरह से खूनी दस्त या रक्तातिसार भी एक ऐसी समस्या है.

जो कि एक खतरनाक बीमारी है इससे रोगी को बहुत कठिनाई होती है तो आज के इस ब्लॉग में हम इसी समस्या के बारे में विस्तार से बात करने वाले हैं इस ब्लॉग में हम इस समस्या के कारण लक्षण और उपचार के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं.

खूनी दस्त या रक्तातिसार

वैसे तो इस समस्या का नाम रक्तातिसार होता है लेकिन साधारण भाषा में इसको खूनी दस्त के नाम से जाना जाता है जो कि एक खतरनाक बीमारी है इस समस्या में रोगी को मल के लिए पाखाना जाना पड़ता है और इसमें रोगी के मल के साथ खून निकलता है जिससे रोगी को शरीर में खून की कमी भी होने लगती है और इसके अलावा रोगी को और भी कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं और यह रोग एक संक्रमण रोग है जो कि बैक्टीरिया और पैरासाइटिस की वजह से उत्पन्न होता है जिससे रोगी के शरीर की आंतों में संक्रमण फैल जाता है .

उससे रोगी की आंतों में सूजन या दर्द होने लगता है और इससे रोगी के शरीर में खाया पिया हुआ भोजन पच नहीं पाता जिससे भोजन बिना पचे बाहर आने लगता है खूनी दस्त एक ऐसा रोग है जो रोगी को बार-बार हो सकता है क्योंकि यह रोग कुछ दिनों तक ठीक रहता है और बाद में फिर से दूषित भोजन या पानी के सेवन से यह रोग उत्पन्न होने लगता है इस रोग के उत्पन्न होने पर रोगी को काला गाढ़ा व चमकदार मल आता है वैसे तो यह रोग किसी भी समस्या में उत्पन्न हो सकता है लेकिन ज्यादातर यह रोग 20 से 40 वर्ष की आयु या 60 वर्ष की आयु से ऊपर के लोगों में देखने को मिलता है

खूनी दस्त के कारण

अगर खूनी दस्तों के कारण की बारे में बात की जाए तो इस समस्या के उत्पन्न होने के पीछे बहुत सारे कारण होते हैं जैसे दूषित पानी या भोजन का सेवन करना, बासी भोजन का सेवन करना, किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना, संक्रमित व्यक्ति की चीजों को इस्तेमाल करना, बिना हाथ धोए खाना खाना, सोच के बाद साबुन से न हाथ धोना, दूषित जगह पर रहना, फल व सब्जियों को बिना धोए खाना अधिक शराब का सेवन करना, ज्यादा औषधियां व एस्प्रिन आदि का इस्तेमाल करना, स्त्रियों में मासिक धर्म बंद होना, शरीर में खून की कमी आना, रोगी को उल्टी की समस्या उत्पन्न होना, कब्ज़ व क्षय रोग होना, रोगी का मानसिक विकारों से ग्रस्त होना, आमाशय में शोध होना यह कुछ ऐसे कारण होते हैं जो कि इस समस्या का कारण बनते हैं लेकिन इसके अलावा भी इस समस्या के उत्पन्न होने के बहुत सारे कारण होते हैं

खूनी दस्त के लक्षण

अगर खूनी दस्त के लक्षणों के बारे में बात की जाए तो इस समस्या के बहुत सारे लक्षण भी होते हैं वैसे तो इस समस्या की शुरुआत में रोगी को पता नहीं चलता लेकिन बाद में इस समस्या के उत्पन्न होने पर अचानक से रोगी को उल्टी व मल के साथ खून निकलने लगता है, रोगी को चक्कर आना व आंखों में अंधेरा छाने लगता है, शरीर में कमजोरी थकावट आलस्य घुटन महसूस होने लगती है, रोगी का गला व मुंह सूख जाता है, रोगी को बार-बार प्यास लगती है, रोगी के शरीर में खून की कमी आना, रोगी के पल्स (नाड़ी) तेज व कम होना, ब्लड प्रेशर या लो ब्लड प्रेशर की समस्या उत्पन्न होना, रोगी के जीभ और होंठ सूखे हुए नजर आना, रोगी को एकदम पसीना आना व ठंड लगना, मितली आना, बार बार मल आना, एकदम भूख न लगना, शरीर में पानी की कमी होना, पेट में आफरा आना, पेट बिल्कुल चिपक जाना, रोगी की आंतों में सूजन व दर्द होना, रोगी के शरीर में विटामिंस की कमी के कारण त्वचा के रोग होना, रोगी का वजन घटना, हल्का बुखार, सर दर्द होना, इसके अलावा भी इस समस्या के बहुत सारे लक्षण दिखाई देते हैं

क्या खाना चाहिए

  • रोगी को दही दूध, लस्सी, छाछ को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाना चाहिए  नारियल का पानी, नींबू और फलों के रस आदि
  • रोगी को नर्म पदार्थ खिलाने चाहिए जैसे अकेला बिस्किट चावल इत्यादि
  • रोगी को हमेशा हल्का व सुपाच्य भोजन का सेवन करना चाहिए
  • रोगी को हमेशा एक गिलास गर्म पानी का सेवन करना चाहिए
  • 250 ग्राम मेथी के दाने पीसकर शुद्ध देसी घी में भूनकर 250 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर लड्डू बनाना चाहिए और हर रोज 1 छोटा लड्डू खाना चाहिए

क्या नहीं खाना चाहिए

  • रोगी को ज्यादा मिर्च मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा तले हुए भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा रोगी को ज्यादा रेशेदार पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा कठोर भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा मिठाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए

क्या करना चाहिए

  • रोगी को दो चम्मच जामुन का रस दो चम्मच गुलाब जल और बिल्कुल थोड़ी चीनी को मिलाकर पीना चाहिए
  • जामुन के पेड़ की छाल को कूटकर एक कप पानी में उबालना चाहिए और जब आधा कप पानी रह जाए तब उसको शहद में मिलाकर पीना चाहिए
  • रोगी को सूखे हुए आंवले रात में भिगोकर सुबह खिलाने चाहिए रोगी को तवे पर भुने हुए जीरे को काले नमक के साथ मिलाकर दहि या लस्सी के साथ पीना चाहिए
  • रोगी को हरा धनिया और चीनी चबा चबा कर खाने चाहिए
  • रोगी को हर रोज सुबह सुबह की खुली हवा में घूमना चाहिए व व्यायाम और प्राणायाम आदि करने चाहिए
  • रोगी को हर रोज सुबह सुबह एक गिलास उबले हुए पानी को ठंडा करके पीना चाहिए

क्या नहीं करना चाहिए

  • रोगी को दूषित भोजन में दूषित पानी का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को आहार विहार से बचना चाहिए
  • रोगी को अपने शरीर में पानी कमी नहीं होने देनी चाहिए
  • रोगी को गंदे पानी से स्नान नहीं करना चाहिए वह गंदी जगह पर नहीं जाना चाहिए
  • रोगी को गंदे इलाके में काम करने से बचना चाहिए
  • रोगी को तालाब या नहर आदि में स्नान नहीं करना चाहिए
  • रोगी को सोच के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह से धोना चाहिए
  • रोगी को बिना धोए फल व सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए

लेकिन फिर भी अगर किसी को खूनी दस्त की समस्या उत्पन्न हो जाती है तब उसको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए क्योंकि यह एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है इससे रोगी की मौत भी हो सकती है या आप कुछ आयुर्वेदिक औषधियों में दवाइयों का भी इस्तेमाल करके इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं जिनके बारे में हमने आपको नीचे बताया है उन सभी को आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार इस्तेमाल करें.

चरक फार्मास्युटिकल्स टेबलेट अल्सारेक्स   2-2 गोली दिन में 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार या 3 गोली दिन में 2 बार समान भाग का जीरा और दोगुना मक्खन या मीठे नींबू के रस के साथ 6-12 सप्ताह तक सेवन कराना अत्यन्त कल्याणकारी है।  बसु कैपसूल बेक्टेफर 1-2 कैपसूल दिन में 3 बार मक्खन के अनुपान के साथ दें. इण्डोजर्मन डायोनिल कैपसूल 1-2 कैपसूल रोगी को भोजनोपरान्त पानी, मट्ठा या केला आदि के साथ दें।

Leave a Comment