खांसी के लक्षण खांसी होने के कारण खांसी की आयुर्वेदिक दवा

खांसी के लक्षण खांसी होने के कारण खांसी की आयुर्वेदिक दवा

वैसे तो दुनिया में बहुत सारी बीमारियां फैली हुई है लेकिन कुछ ऐसी लेकिन बहुत सारी ऐसी साधारण बीमारियां भी है जो कि लगभग सभी के अंदर होती है और ये बीमारियां अपने आप ही ठीक हो जाती है लेकिन यह साधारण बीमारियां होने के बावजूद भी कई बार खतरनाक साबित हो सकती है क्योंकि अगर यह बीमारियां लंबे समय तक शरीर में रहती है और इनका इलाज नहीं करवाया जाता.

तब यह बीमारियां किसी दूसरी बड़ी बीमारी को भी जन्म दे सकती है तो इसी तरह से खांसी भी एक आम बीमारी है जो कि लगभग सभी को होती है लेकिन अगर इसका समय पर ध्यान नहीं दिया जाता तब यह बहुत घातक साबित हो सकती है तो आज की इस ब्लॉग में हम खांसी के बारे में पूरी जानकारी आपको देने वाले हैं कि खांसी कैसे होती है इससे कैसे बचा जा सकता है और खांसी को दूर करने के घरेलू उपाय.

खांसी क्या है

सबसे पहले हम बात करते हैं खांसी क्या होती है वैसे तो खांसी एक साधारण और आम समस्या है जो कि हर बूढ़े, जवान, बच्चे और स्त्री, पुरुष सभी में होती है लेकिन खांसी एक आम और साधारण समस्या होने के बावजूद भी एक खतरनाक रोग है इस रोग के होने के बाद कई बार इंसान को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है वैसे सामान्य तौर पर देखा जाए तो खांसी दूसरे रोगो के कारण ही उत्पन्न होती है क्योंकि जब किसी इंसान को हल्का सर्दी जुखाम, हल्का बुखार, निमोनिया, तपेदिक, दमा, या जिगर की खराबी जैसे रोग हो जाते हैं तब उसको हल्की हल्की खांसी महसूस होने लगती है और फिर ठंडा या गर्म खाने से यह दौरे के रूप में उठने उड़ने लगती है.

खांसी होने के कारण

जैसा कि हमने आपको बताया खांसी कोई रोग नहीं है बल्कि यह रोग किसी दूसरी बीमारियों के शरीर में जन्म लेने से ही उत्पन्न होता है लेकिन उसके उत्पन्न होने के भी कई कारण हो सकते हैं जैसे गले और फेफड़ों के अंदर सूजन आना, कीटाणुओं का संक्रमण होना, ज्यादा धूल व मिट्टी आदि के कणों से एलर्जी होना, किसी घुटन वाले स्थान पर काम करना, सर्दी जुखाम लगने पर ठंडे पानी का सेवन करना या चिकनी चीजों का सेवन करना, गरम मिठाई या भोजन करने के बाद ठंडा पानी पीना, फेफड़ों की छोटी नलिकाओं में उत्तेजना पैदा होना या ज्यादा धूम्रपान शराब व उत्तेजक पदार्थों का सेवन करना इन सभी के खांसी उत्पन्न हो सकती है

खांसी के लक्षण

वैसे जब किसी इंसान के शरीर में खांसी उत्पन्न होती है तब उसको बहुत सारे लक्षण देखने को मिलते हैं लेकिन ज्यादातर खांसी होने पर सिर में जकड़न महसूस होना सूखी खांसी में बलगम न आना, खांसी होने पर आसानी से बलगम आना और कई बार ज्यादा मात्रा में बलगम आना, गले में झनझनाहट रहना, ज्यादा लंबी खांसी होने पर साँस लेने में दिक्कत आना या सांस उठना ये कुछ खांसी ऐसे लक्षण हैं जो कि खांसी होने पर देखने को मिलते हैं

क्या-क्या खाना चाहिए

जैसा कि हमने आपको इस ब्लॉग की शुरू से बताया है की खांसी एक ऐसा रोग है जो कि किसी दूसरे लोग के उत्पन्न होने पर शरीर में दस्तक देता है लेकिन इस रोग से बचने के लिए आपको खानपान की ओर ध्यान देना बहुत ही जरूरी होता है क्योंकि अगर आप गलत चीजों का सेवन करते हैं तो रोग बढ़ सकता है और इससे पीछा छुड़ाना मुश्किल हो जाएगा लेकिन अगर आप सही चीजों का इस्तेमाल करते हैं तब आप इसे आसानी से पीछा छुड़ा सकते है.

  • खांसी होने पर आपको कम से कम मात्रा में भोजन करना चाहिए और आटे की रोटियों का सेवन करना चाहिए
  • आपको बकरी का दूध, चाय, कॉफी जैसे पदार्थों का सेवन करना चाहिए
  • गर्म पानी में ग्लूकोस मिलाकर पीना चाहिए
  • आपको मीठा संतरा, मौसमी, अमरुद, खजूर, अंजीर, चीकू, तरबूज, पीता, आदि का सेवन करना चाहिए
  • आपको मूली, मेथी, लौंग, इलाइची, हल्दी, शहद, माल्टा, दालचीनी और पालक, बथुआ आदि का सेवन करना चाहिए
  • बार-बार गर्म पानी का सेवन करना चाहिए
  • अगर आपको सूखी खांसी है तब आपको दालचीनी, लौंग, इलायची ,मिश्री आदि चुसते रहना चाहिए

क्या नहीं खाना चाहिए

  • आपको चिकनी चीजों व फास्ट फूड से परहेज करना चाहिए
  • खांसी होने पर आपको कम से कम मिठाई का सेवन करना चाहिए
  • आपको चावल का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए
  • आपको ज्यादा घी तेल में मिर्च मसालेदार और खट्टे व तीखे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए
  • आपको ज्यादा ठंडे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए जैसे कोल्ड ड्रिंक शरबत बर्फ जूस आदि
  • आपको फ्रिज वाटर कूलर आदि का पानी नहीं पीना चाहिए

क्या-क्या करना चाहिए

  • आपको सुबह-सुबह हल्की-फुल्की बयान और प्राणायाम आदि करने चाहिए
  • अपने शरीर में कब्ज की समस्या उत्पन्न नहीं होने देनी चाहिए
  • आपको ज्यादा ठंड में बिना कपड़े के बाहर नहीं जाना चाहिए और गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए
  • आपको गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए और पानी में शहद या गलूकोज़ मिलाकर पीना चाहिए
  • सुबह सुबह शुद्ध हवा में घूमना चाहिए

क्या नहीं करना चाहिए

  • आपको ज्यादा ठंड में हीटर चलाकर नहीं सोना चाहिए
  • आपको ठंड के समय में नंगे बदन वह नंगे पांव बाहर नहीं जाना चाहिए
  • आपको नहर तालाब आदि में नहीं नहाना चाहिए
  • आपको बारिश या सर्दी के मौसम में बाहर नहीं घूमना चाहिए
  • आपको ज्यादा धूल मिट्टी वह गंदगी वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए
  • आपको धूम्रपान करने से परहेज करना चाहिए हल्की सर्दी जुकाम होने पर गर्म व ठंडी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए
  • आपको नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए

खांसी की आयुर्वेदिक दवा

अगर फिर भी आपको खांसी की समस्या उत्पन्न हो जाती है तब आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए या फिर आप कुछ आयुर्वेदिक औषधियों व दवाइयों का इस्तेमाल करके भी खांसी से छुटकारा पा सकते हैं जिनके बारे में हमने आपको नीचे बताया है इन सभी चीजों को आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार इस्तेमाल कर सकते हैं.

  • पेण्टाकेयर दन्तरादि क्वाथ – ब्रोकियल अस्थमा, एलर्जिक रैस्पाइरेटरी डिस्आर्ड्स इन क्लूडिंग कफ एण्ड रिहानाइटिस में लाभकर है। 5-15 मिली० दिनमें 2-3 बार दें।
  • मुक्ति धत्तर प्लस सीरप – ब्रोकियल अस्थमा, क्रोनिककाय, डिस्पीनिया (सांस फूलना), एलर्जिक खाँसी, ब्रान्कोस्पाज्म में लाभकारी है। वयस्कों को 10 मिली० दिन में 3 बार । बच्चों को 5 मिली० दिन में 3 बार दें।
  • कैप्रो ब्रोन्केप कैपसूल – काली खाँसी, सूखी खाँसी, ब्रोकियल अस्थमा, एलर्जिक ब्रोंकाइटिस, ब्रोंकाइटिस खाँसी, ईयोसिनो फीलिया, लैरिजाईटिस, एलर्जिक जुकाम में लाभकारी है। 1-2 कैपसूल दिनमें 2-3 बार, बच्चों को। कैपसूल दिन में 2 बार दें।
  • आयुलैब्स फिजल कैपसूल – तीव्र व जीर्ण अस्थमा, अस्थमेटिक ब्रोंकाइटिस, एलर्जिक जुकाम, खाँसी तथा हेफीवर में लाभकारी है। 1-2 कैपसूल दिन में 2-3 बार दें।

खांसी के लिए घरेलू उपाय

अदरक का स्वरस 2 तोला और शहद 6 माशा इन दोनों को मिलाकर दिन में 2 बार (सुबह-शाम) सेवन करने से कफ की खाँसी, श्वास, जुकाम और कफ का नाश हो जाता है।

कुछ बहेड़े लेकर गाय के घी से चुपड़कर तदुपरानत गाय के गोबर में लपेटकर व सुखाकर आग में पका लें। पकने पर गोबर से उनको निकालकर पोंछकर, छिलकों को हर समय मुख में रखकर चूसने से प्रत्येक प्रकर की खाँसी (मुख्यतः वातज या सूखी खाँसी) में लाभ होता है। यह बुढ़ापे की खाँसी का अत्यनत हितकर प्रयोग है।

मुलहठी, काली मिर्च और मिश्री प्रत्येक समान मात्रा में लेकर पीस लें। इसकी 3-3 माशा की मात्रा में दिन में 4-5 बार सेवन करने से पित्त की खाँसी में आराम जाता है।

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