जीरो का आविष्कार किसने और कब किया

जीरो का आविष्कार किसने और कब किया

शून्य का आविष्कार गणित के इतिहास में एक महान खोज है और यह दुनिया में होने वाले कुछ महान अविष्कारों में से एक है शून्य केअविष्कार की गणित में अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका है। पूर्णांकों तथा वास्तविक संख्याओं के लिये यह योग का तत्समक अवयव (additive identity) है शून्य की सबसे खास बात यह की किसी भी संख्या को शून्य से गुणा करने से शून्य प्राप्त होता है और किसी भी संख्या को शून्य से जोड़ने या घटाने पर वापस वही संख्या प्राप्त होती है

और शून्य के पीछे लगे बिना कोई संख्या बड़ी नहीं बन सकती एक में शून्य लगाइए तो दस हो जाता है और शून्य बढ़ाते जाइए संख्या बड़ी होती जाएगी सैकड़ा, हजार, लाख, दस लाख, करोड़, दस करोड़, अरब और फिर खरब है यदि शून्य काअविष्कार नही होता तो शायद इतनी बड़ी संख्या नही होती और गणित  को हल करना भी बड़ा मुस्किल होता  इसलिए शून्य के अविष्कार को इतना महवपूर्ण माना जाता है

जीरो का आविष्कार

शून्य का आविष्कार किसने और कब किया यह आज तक यह जानकारी छुपी हुई है लेकिन  भारतीय ‌गणितज्ञ वर्षों से ये दावा करते रहे हैं कि शून्य का अविष्कार भारत में किया गया था कहा जाता है की शून्य का आविष्कार भारत में पांचवीं शताब्दी के मध्य में शून्य का आविष्कार आर्यभट्ट जी ने किया उसके बाद ही यह दुनिया में प्रचलित हुई लेकिन अमेरिका के एक गणितज्ञ कहना है कि शून्य का आविष्कार भारत में नहीं हुआ था। अमेरिकी गणितज्ञ आमिर एक्जेल ने ‌सबसे पुराना शून्य कंबोडिया में खोजा है।

और कहा जाता है की सर्वनन्दि नामक दिगम्बर जैन मुनि द्वारा मूल रूप से प्रकृत में रचित लोकविभाग नामक ग्रंथ में शून्य का उल्लेख सबसे पहले मिलता है। इस ग्रंथ में दशमलव संख्या पद्धति का भी उल्लेख है और यह उल्लेख  सन् 498 में भारतीय गणितज्ञ एवं खगोलवेत्ता आर्यभट्ट ने आर्यभटीय ([ सङ्ख्यास्थाननिरूपणम् ]) में कहा है और सबसे पहले भारत का ‘शून्य’ अरब जगत में ‘सिफर’ (अर्थ – खाली) नाम से प्रचलित हुआ  लेकिन फिर लैटिन, इटैलियन, फ्रेंच आदि से होते हुए इसे अंग्रेजी में ‘जीरो’ (zero) कहते हैं।

लेकिन शून्य के अविष्कार को लेकर कुछ अलग तथ्य भी है की अगर शून्य का अविष्कार 5वीं सदी में आर्यभट्ट जी ने किया फिर हजारों वर्ष पूर्व रावण के 10 सिर बिना शून्य के कैसे गिने गए बिना शून्य के कैसे पता लगा कि कौरव 100 थे ऐसे कुछ अलग अलग बाते है लेकिन आज तक यही कहा जा रहा की शून्य का अविष्कार 5वीं सदी में आर्यभट्ट जी ने किया था |

यह भी देखें

इस पोस्ट में आपको दशमलव का आविष्कार किसने किया शून्य का महत्व जीरो की संकल्पना शून्य की परिभाषा किसने आविष्कार किया शून्य की खोज किस देश में हुई दशमलव की खोज किसने की जीरो शब्द से संबंधित जानकारी दी गई है अगर आपको यह जानकारी फायदेमंद लगे तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और अगर इसके बारे में आपका कोई भी सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करके जरूर बताएं.

17 Comments
  1. Sambhav kumar yaji says

    आप के हिन्दी कि जानकारी मुझै बहुत अच्छा लगा

  2. Hayat says

    Harappa vasi kon hai my question

  3. samir says

    0 की खोज आर्यभट्ट जी से पहले हुई है क्योंकि पांचवी सदी के पहले भी लोग हुआ करते थे और उनकी भी गिनती की जाती थी इतिहास में बताया गया है 0 पर आर्यभट्ट जी ने लगभग 72 घंटे भाषण दिए हैं इसलिए उन्हें 0 का जनक माना जाता है

    1. Raushan Kumar says

      Good salutation

  4. Shanmeet says

    0 to 9 word ka first writings satyug me Maharshi vedvyas dwara Kiya gya tha, Aarya Bhatt ne 0 ka use nomberic akde Ko saral karne ke liye lectures diya tha qki meths me important that.

  5. INDRA MANDLE says

    Thanks bro mera practical ban gaya

  6. Yogesh sahu says

    Mujhe sahin javab chahiye

  7. Yogesh sahu says

    Thanks bro mera kam ho gaya

  8. Jitendra zalaya says

    1 se 9 tak ki sankhya ke bare me bhi bataye

  9. Prahlad says

    आपकी बात से सहमत हू पर शून्य का आविष्कार पहले ही हो चूका था

  10. Raj bahadur karki says

    Sir ji khi par to zero ki khoj bharmgupt ji ne ki hai likha
    I am confused ki really me eska answer kya hai
    Vîstar me bataye kyoki bharmgupt ji ne apne samy me zero ko khoj liya thaa.

  11. AJ style says

    5vi sadi me aryabhat ne hi ki thi.
    Kyo ki hajaro varsh purv ginti 12345678910ke bajay pratham dvithiy tratya chturth pancham etc format me chalti thi uske bad ise short rup me likhne ki kosis ki tab hindi ki ginti d3vnagri ki khoj hue and 9 se age short likhne ke liye 0 ki khoj hue jo arya bhat ni ki .pahle korvo ki sanya ko pratham and dvitiy vali ginti se gina tha.

  12. Mayank Patel says

    पहले संस्कृत में संख्या होती थी ।
    10 को दशम् पड़ा जाता था ।
    18 को अष्टादशा ।
    समझे या और उदाहरण दू ।

  13. Mayank Patel says

    पहले संस्कृत मे संख्या हुआ करती थी ।
    10 को दशम् ।
    18 को अष्टादशा ।

  14. Angad vishwakarma says

    0 ki khoj ho chuki thi tb mera manana hai ya toh ramayan galat hai ya toh 0 ki khoj

  15. Ravi Devkate says

    Are Bhai zero ka aviskar aryabhat ne kiya hai to ravan ke sar 10 hai kaise pata laga .

  16. vinit harsoliya says

    But bro mujhe to ye btao ki ‘zero’ ki khoj hui kese thi??????

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