कॉटन कैंडी का अविष्कार किसने किया

कॉटन कैंडी का अविष्कार किसने किया – Who has invented cotton candy In Hindi

हमने आपको पहले हमारी इस वेबसाइट के ऊपर बहुत सी ऐसी रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी बताई है जिसका इस्तेमाल करके आप अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं या आप अपने किसी तरह के काम कर सकते हैं आप हमारे द्वारा बताई गई इस जानकारी का इस्तेमाल करके पैसे कमा सकते हैं हमने बहुत सी टेक्नोलॉजी के बारे में भी चीजें बताया है. बहुत सी ऐसी चीजों के आविष्कार के बारे में बताया है जो कि शायद कम लोग जानते थे तो आज भी हम आपको इस पोस्ट में रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी बताएंगे इसमें इस पोस्ट में आज हम आपको कॉटन कैंडी के आविष्कार के बारे में बताएंगे वैसे तो दुनिया में बहुत सी अलग अलग चीजों को खाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि लोगों का अलग-अलग चीजों के प्रति अपना आकर्षण होता है

लेकिन दुनियाभर में बहुत सी ऐसी चीजें  होती है जो कि लगभग हर इंसान को पसंद आ जाती है तो इसी तरह की चीजों में से एक कॉटन कैंडी भी ऐसी ही चीज है जो कि दुनिया भर में बहुत लोकप्रिय है और इस कॉटन कैंडी को लोग बहुत ही  ख़ुशी के साथ खाते हैं. वैसे हम बता दे आपको कि इस कॉटन कैंडी के बारे में भारत में लोग कम जानते हैं क्योंकि भारत में इसका एक और नाम है इसको भारत में गुड़िया के बाल के नाम से जानते हैं और यह पूरे भारत में गुड़िया के नाम से फेमस है और इसके में किसी तरह की मिलावट का भी डर नहीं होता क्योंकि यह एकदम बढ़िया बिल्कुल अच्छी होती है. और यह छोटे से लेकर बड़े तक किसी भी तरह का बच्चा या बुडा इसको खा सकता है तो आज हम आपको इस पोस्ट में कॉटन कैंडी के अविष्कार के बारे में बताएंगे किस तरह से इसका आविष्कार किया सबसे पहले किसने इसको बनाया था तो कॉटन कैंडी के बारे में पूरी जानकारी विस्तार से आपको नीचे दे रहे हैं तो देखिए

कॉटन कैंडी का अविष्कार किसने किया

Who has invented cotton candy In Hindi? आपने बहुत सी जगह पर देखा होगा कि कॉटन कैंडी वाला कॉटन कैंडी बेच रहा होता है जैसे कि किसी भी मेले सर्कस त्योहार या किसी अन्य उत्सव के ऊपर कॉटन कैंडी बहुत ज्यादा मात्रा में बेची जाती है क्योंकि उन दिनों में बच्चे और बूढ़े सभी तरह के लोग कॉटन कैंडी खाना बहुत पसंद करते हैं वैसे तो कॉटन कैंडी एक बहुत ही अच्छी चीज है लेकिन हम आपको बता दूं कि इस को दुनिया भर में अलग अलग नाम से जाना जाता है ऑस्ट्रेलिया में इसको पर Fairy Floss  के रूप में जाना जाता है तो दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड में इसको Candy Floss के नाम से जाना जाता है .

कॉटन कैंडी को बनाने में लगभग ज्यादा कुछ नहीं लगता सिर्फ इसके अंदर चीनी ही लगती है और उस चीनी में आप किसी भी तरह का रंग डाल सकते हैं वैसे तो लगभग कॉटन कैंडी के अंदर गुलाबी रंग ही चलता है कॉटन कैंडी बिल्कुल पतली-पतली बाल से भी बारीक  तार से बनी होती है अगर हम इसको शुरू में बनते हुए देखते हैं तो इसकी तार इतनी होती है कि अगर इसका एक तार होगा तो हम देख भी नहीं पाएंगे और जब यह बनना शुरू होती है तो धीरे-धीरे जैसे ही यह बनती है तो बाद में हम इसको देख सकते हैं और यदि हम इसको अपने हाथों के अंदर पकड़ कर इसको इकट्ठा कर देते हैं तो यह बिल्कुल थोड़ी सी हो जाती है और अगर हम इसको दूर से देखते है. तो यह बहुत बड़ी और यह जब बनाई जाती है तो इसके में लगभग सबसे ज्यादा हवा की मात्रा होती है और इसके अंदर इसमें सिर्फ 1 औंस या 30 ग्राम तक वजन होता है.

अब हम आपको बताते हैं कि कॉटन कैंडी का आविष्कार किसने किया था आप को बता दू की कॉटन कैंडी के आविष्कार के बारे में जानकार हैरान हो जाओगे क्योंकि इस कॉटन कैंडी का आविष्कार एक दंत चिकित्सक ने किया था कॉटन कैंडी से पहले 15 वीं शताब्दी में मिठाइयों पर सजाने के लिए लिए स्पन चीनी का इस्तेमाल किया जाता था उस समय में उस समय में चीनी को पिघलाया जाता था चम्मच के साथ चीनी को घोलकर स्पन शुगर बनाया जाता था कॉटन कैंडी की खोज या आविष्कार यूरोप में हुआ था 1897 में दंत चिकित्सक  William Morrison और John C. Wharton ने कॉटन कैंडी को बनाने लगे और उन दोनों ने मिलकर कॉटन कैंडी को पहली बार बनाया और वहां से कॉटन कैंडी का अविष्कार हुआ था उस समय पर इसका नाम फेरी लॉस रखा गया था . William Morrison ने कॉटन कैंडी के 68,655 बॉक्स, $ 7 प्रति बॉक्स की कीमत पर बेचकर जबर्दस्त मुनाफा भी कमाया. उसने जबरदस्त मुनाफा इस बात के कारण कमाया कुछ समय में इसकी बहुत मांग बढ़ गई थी और इतनी मांग बढ़ने के कारण उन्होंने इतना पैसा उसके जरिए कमा लिया.

1949 में स्वर्ण पदक के एक स्प्रांग बेस का आविष्कार होने तक कॉटन कैंडी मशीन बेहद अविश्वसनीय थीं, और उसके बाद से, उन्होंने लगभग सभी वाणिज्यिक कॉटन कैंडी मशीनों का निर्माण किया है और यूएस में बहुत अधिक सोसा चीनी का उत्पादन किया है

कॉटन कैंडी बनाने के लिए पहले चीनी को गर्म करके मशीन में डाला जाता है और फिर उस मशीन को धीरे-धीरे घुमाना शुरू किया जाता है और जैसे ही वह मशीन घूमना शुरू होती है तो कॉटन कैंडी बनना शुरू हो जाती है कॉटन कैंडी के अंदर लगभग 99% चीनी होती है और 1% किसी भी तरह का रंग या flavors हो सकता है और 19वीं शताब्दी में सिर्फ वही लोग कॉटन कैंडी को खा सकते थे जो कि पैसे वाले होते थे. क्योंकि उस समय में यह बहुत महंगी होती थी और उस समय में कॉटन कैंडी बनाने की मशीन का आविष्कार नहीं हुआ था जब मशीन नहीं आएगी तो इस कॉटन कैंडी को हाथ से बनाया जाता था जो कि बहुत ज्यादा समय में तैयार होती थी जब मशीन आई तो धीरे-धीरे इसकी मांग पूरी होने लगी और यह सस्ती हो गई.

आज के समय में कॉटन कैंडी पूरी दुनिया के कोने कोने में प्रसिद्ध हो चुकी है और आज के समय में सामान्य लोग भी खा सकते हैं जो लोग पहले के समय में कॉटन कैंडी नहीं कर सकते थे क्योंकि इसका दाम ज्यादा होता था. लेकिन आज के समय में इतनी टेक्नोलॉजी के कारण बहुत ही अच्छी अच्छी तरह से कॉटन कैंडी बनाई जाती है और इनका दाम भी बहुत कम है और भारत में भी कॉटन कैंडी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है और आज दुनियाभर में बहुत बड़ी बड़ी कंपनी कॉटन कैंडी बना रही है दुनिया की सबसे ज्यादा और सबसे बड़ी कॉटन कैंडी बनाने वाली कंपनी कनाडा की है जिसका Tootsie Roll नाम है और यह अलग-अलग फ्लेवर की कॉटन कैंडी बनाती है जो कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है.

तो आज हमने आपको एक बहुत ही अच्छी और बढ़िया जानकारी दी है इस पोस्ट में हमने आपको कॉटन कैंडी के आविष्कार कॉटन कैंडी का अविष्कार किसने किया – Who has invented cotton candy In Hindi cotton candy ka avishkaar kisane kiya cotton candy ki khoj kisne ki cotton candy sabse pahle kisne banayi  के बारे में बताया तो शायद अब आपको पता भी चल गया होगा कि कॉटन कैंडी क्या होती है और इसको किस तरह से बनाया जाता है तो यदि आपको यह जानकारी पसंद आए तो शेयर करना ना भूलें और यदि आपको इसके बारे में कोई सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं.

Leave A Reply

Your email address will not be published.