टरबाइन का आविष्कार किसने किया और कब किया

टरबाइन का आविष्कार किसने किया और कब किया

टरबाइन एक रोटरी मैकेनिकल डिवाइस है जिसके द्वारा किसी बहते हुए द्रव (जैसे हवा, पानी) की गतिज ऊर्जा ( kinetic energy)  का घूर्णन ऊर्जा (Rotating energy) में परिवर्तित करके मशीनी कार्य के लिए इस्तेमाल की जाती  है एक टरबाइन एक टर्बोमाचिन है जिसमें कम से कम एक घुमने वाला भाग होती है जिसे रोटर असेंबली कहा जाता है, जो कि ब्लेड से शाफ्ट या ड्रम हो सकता है और ब्लेड पर तरल पदार्थ या अन्य पदार्थ जैसे जैसे हवा, पानी  दबाव डालता है तो वह घूमते है जिस से वह गतिज ऊर्जा ( kinetic energy) का घूर्णन ऊर्जा (Rotating energy) में परिवर्तित कर देती है

आज विदुत उत्पादन में टरबाइन का इस्तेमाल बहुत किया जाता  है इसमें गतिज ऊर्जा को घूर्णन ऊर्जा (Rotating energy) में परिवर्तित करके  बिजली उत्पादन  करने में इस्तेमाल  किया जाता है   जैसे पवन चक्की काम करती है जिसे खुली जगह में लगाया जाता है  जहाँ पर पर्याप्त हवा चलती है जिससे गतिज ऊर्जा को घूर्णन ऊर्जा में बदल के उसे से बिजली बनाई जाती है टरबाइन का इस्तेमाल कई प्रकार से किया जाता है और उपयोग के अनुसार टरबाइन भी कई प्रकार की होती है टरबाइन का इस्तेमाल स्थान और  वातावरण को देखकर किया जाता है जैसे खुले स्थानों पर पवन चक्की लगाकर और पहाड़ी इलाकों में जल टरबाइन का इस्तेमाल बड़े बड़े डैम बनाकर किया जाता है

टरबाइन का आविष्कार

सबसे पहले भाप टरबाइन का आविष्कार ब्रिटिश इंजीनियर सर चार्ल्स पार्सन्स सन , 1884 में किया था में और  “टरबाइन” शब्द को सन ,1822 में फ्रांसीसी खनन इंजीनियर क्लाउड बर्डिन ने लैटिन शब्द टर्बो या भंवर से, “मेस टर्बाइन हाइड्रुलिक्स ओ मशीन रोटोटोयर्स ए ग्रेडे वेटेसे” से लिया था ,

जिसे  उन्होंने एकेडेमी रॉयल डेस विज्ञान में प्रस्तुत किया था और पहली  पानी टरबाइन का निर्माण पेरिस क्लाउड बर्डिन के एक पूर्व छात्र  बेनोइट फोरनेरोन ने किया और 1 9वीं सदी के मध्य में टरबाइन डिजाइन के तरीकों को विकसित किया गया था

टरबाइन के प्रकार

टरबाइन कई प्रकार की होती है इनका उपयोग अलग अलग तरीके से किया जाता है जैसे ;

  • गैस टरबाइन (Gas turbine)
  • भाप टरबाइन (Steam Turbine)
  • पवन टरबाइन(Wind Turbine)
  • जल टरबाइन(water turbine )

गैस टरबाइन (Gas turbine) 

गैस टरबाइन भी एक ऊष्मा इंजन है गैस टरबाइन को टरबाइन इंजन के रूप में जाना जाता है ऐसे इंजन में आमतौर पर एक या अधिक टर्बाइनों के अलावा एक इनलेट, पंखे, कंप्रेसर,  और नोजल शामिल होता है जो भाप टरबाइन की तरह काम करती है और इसमें घुमने वाले ब्लेड  पर दबाव हवा  के साथ फ्यूल के जलने से उत्पन्न गर्म हवा टकराती है जिससे वह ब्लेड हाई स्पीड से रोटेट होने लगती है और shaft  घुमने  लगती है और इस तरह बिजली बनती  है  इससे प्राप्त होने वाली बिजली 30000KW तक हो सकती है

भाप टरबाइन (Steam Turbine)

भाप टरबाइन का आविष्कार ब्रिटिश इंजीनियर सर चार्ल्स पार्सन्स सन 1884 में किया था भाप टरबाइन एक ऐसी मैकेनिकल डिवाइस है जिसमें भाप की उष्मा-ऊर्जा को गतिज उर्जा में परिवर्तित किया जाता है जिसमे बहुत अधिक दबाव वाली भाप को एक नोजल से निकला जाता है और  जिसके सामने एक वहील होता है और उस पर लगे ब्लड उसे जब भाप टकराती है तो वह बहुत तेजी से बहुत तेजी से घूमता है और इससे बिजली बनती है इसे बनने वाली बिजली 0.5KW से 500MW तक होती है |

जल टरबाइन(water turbine )

जल टरबाइन का इस्तेमाल प्राचीन समय से भारत में किया जा रहा है भारत के पहाड़ी इलाकों में छोटे-छोटे बांध बनाकर पहिए नुमा बेलनाकार आकृति के ऊपर ब्लेड बनाकर उन पर पानी गिराकर आटा चकियां और भी छोटे-मोटे मशीनी कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन आधुनिक समय में बिजली की मांग बढ़ने के साथ वोटर टरबाइन का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होने लगा और बड़े बड़े डैम बनाकर बड़ी-बड़ी टरबाइनों से बहुत बड़ी मात्रा में बिजली उत्पादन किया जा रहा है यह बिजली उत्पादन  का सस्ता और आसान तरीका है |

पवन टरबाइन(Wind Turbine)

पवन टरबाइन का इस्तेमाल पवन चक्की में   किया जाता है बड़े बड़े खुले इलाकों में जहां हर दम हवाएं चलती रहती है बड़ी बड़ी पवन चक्कियों के अंदर टरबाइन लगाकर बिजली  बनाई जाती है  इसमें प्राकृतिक हवाएं अपने आप टरबाइन को घुमाती रहती है और जिससे बिजली बनती रहती है

यह भी देखें

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1 Comment
  1. सुधीर says

    टरबाईन को हाई स्टीम टमप्रेचर पर क्यो नही चलाते है

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