नॉर्थ सेंटिनल आईलैंड के बारे में कुछ रोचक तथ्य

नॉर्थ सेंटिनल आईलैंड के बारे में कुछ रोचक तथ्य

आज इस पोस्ट में हम आपको एक बहुत ही बढ़िया बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी बताएंगे यह जानकारी आप सभी के लिए जाना बहुत ही जरूरी है.आप में से बहुत से लोग उतरी सेंटिनल आईलैंड के बारे में सुना होगा.लेकिन बहुत से लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं है. इस पोस्ट में आज हम आपको उतरी सेंटिनल आईलैंड से जुड़ी हुई कुछ महत्वपूर्ण जानकारी बताएंगे जैसे उतरी सेंटिनल आईलैंड कहां पर है इस पर कौन सी जनजाति रहती है और यह द्वीप हमारी दुनिया से अलग क्यों है और यहां के लोग किस तरह से यहां पर रहते हैं. और इसके साथ साथ इस द्वीप का पूरा इतिहास आज की इस पोस्ट में हम आपको विस्तार से बताएंगे तो आप इस पोस्ट को पूरा और लास्ट में जरूर पढ़ें और यदि आपको यह पोस्ट पसंद आए तो लाइक और शेयर जरूर करें और यदि आपका इसके बारे में कोई सवार या सुझाव है तो आप कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं.

उतरी सेंटिनल आईलैंड

सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि नॉर्थ आइसलैंड क्या है नॉर्थ आइसलैंड बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान द्वीप का एक द्वीप है यानि वैसे तो यह भारत का ही एक हिस्सा है लेकिन यहां पर रहने वाले लोगों के को यह तक नहीं पता है कि भारत क्या है और भारत में किस तरह के लोग रहते हैं और ना ही यहां के लोगों को हमारी दुनिया के बारे में पता है इन लोगों के लिए सिर्फ इनका यह 60 वर्ग किलोमीटर का द्वीप ही पूरी दुनिया है यहां पर रहने वाले लोगों को अपने द्वीप के अलावा कुछ भी नहीं पता है. और इसके अलावा अगर इनके पास हमारे लोग जाते हैं तो इनकी नजर में वे सब एलियंस है और उनसे इस जनजाति को बहुत ज्यादा खतरा है इसलिए यह देखते ही उनको मारने की सोचते हैं या उनको मर भी देते हैं.

इसलिए इसके ऊपर किसी भी इंसान का जाना मना है इसके ऊपर भारत सरकार ने पाबंदी लगा दी है. ताकि इन जनजाति को सुरक्षित रखा जा सके और हमारी दुनिया के जाने वाले लोगों को अपनी जान ना गंवानी पड़ी क्योंकि यह लोग तीर और भाले चलाने में बहुत ज्यादा तेज होते हैं और यह किसी भी इंसान की जान ले सकते हैं.

यहां के लोग पोर्ट ब्लेयर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लगभग 50 किलोमीटर ही दूर रहते हैं और यहां पर इन लोगों को इंडियन नेवी का बेस कैंप भी मिल सकता है.और इसके अलावा इन लोगों को भारत सरकार की आधुनिक वे सभी सुविधाएं मिल सकती है जो हमें मिलती है. लेकिन लोगों के लिए हमारी आधुनिक सुविधाएं कुछ मायने नहीं रखती है. यह अपनी दुनिया में रहना चाहते हैं और वहीं पर यह लोग खुश होते हैं.

नॉर्थ सेंटिनल आईलैंड की खोज

नॉर्थ सेंटिनल आईलैंड को सबसे पहली बार किसने खोजा था यानी इस आईसलैंड का इतिहास क्या है.

1. ऐसा माना जाता है कि इस आइसलैंड को सबसे पहली बार Famous Explorer Marco Polo ने 13th शताब्दी में खोजा था. और उन्होंने उसी समय यह बात भी कही थी कि इस जनजाति के लोग अपनी जाति के लोगों को छोड़कर दूसरी किसी भी जाति के लोगों को मार कर खाने में बिल्कुल नहीं हिचकते.

2. इसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के लोगों का यह कहना है कि सत्र में शताब्दी में भी इस आइसलैंड के पास से गुजरे थे और यहां पर उन्होंने कुछ हलचल भी देखी थी.

3. इसके बाद 1867 में भारतीय व्यापारिक जहाज यहां से गुजर रहा था और उस समय मॉनसून का समय था और समुंदर के अंदर बहुत ज्यादा लहरें उठी हुई थी. और इसकी वजह से भारतीय व्यापारी जहाज एक चट्टान से टकरा गया जिनके कारण  जहाज वहीं पर फंस गई. और इस जहाज में सवार लगभग 106 से ज्यादा लोग अपनी जान बचाने के लिए इस आइसलैंड के ऊपर पहुंचे. और वहीं पर सेंटिनल आईलैंड के लोगों ने इनके ऊपर हमला कर दिया और ये लोग अपनी जान बचने के लिए वापस समुंदर में कूद गए. और वंहा से गुजर रहे एक रॉयल नेवी के जहाज ने इन सभी लोगों को बचा लिया.

4. इसके बाद 1956 में भारत सरकार द्वार इन लोगों इस जनजाति को बचाने के लिए एक कानून बनाया गया. जिससे कि इस आइसलैंड के ऊपर 10 किलोमीटर के एरिया में बाहरी दुनिया का कोई भी आदमी नहीं जाएगा जिसकी सुरक्षा इंडियन नेवी करती है क्योंकि इन लोगों की रोग  प्रतिरोधकता शक्ति बहुत कम होती है. जिसके कारण हमारी दुनिया के लोगों की बीमारी इन को अगर एक बार भी लग जाए तो इनकी मृत्यु निश्चित है. अगर हमारी छोटी सी छोटी बीमारी इनको खांसी और जुकाम भी लग जाए तो उनकी मृत्यु हो जाती है. इसीलिए इस जनजाति को लुप्त होने से बचाने के लिए सरकार द्वारा 1956 में यह कानून बनाया गया.

5. 1974 में नेशनल जियोग्राफी की टीम को इस आइसलैंड की डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए इजाजत मिल गई थी. जिसके लिए वे अपनी एक जहाज के जरिए इस आइसलैंड के पास पहुंचे.लेकिन आइसलैंड के लोगों ने इस जहाज को अपनी तरफ आते देख इनके ऊपर तीर और बालों से अटैक कर दिया. जिसके कारण एक तीर डायरेक्टर के पांव में भी लग गया और उसके बाद इस डॉक्यूमेंट्री को बीच में ही छोड़ना पड़ा और यह सभी अपनी जहाज लेकर वापस भाग गए.

6. इसके बाद एक बार फिर से 1981 में एक जहाज यहां पर चट्टान से टकराकर फस गया जो कि सामान ले जा रहा था. और उसके बाद में इस आइसलैंड के लोग एक बार फिर से इनके ऊपर हमला करने के लिए आ आये. लेकिन जहाज थोड़ा ज्यादा दूर फंसा हुआ था. जिसके कारण इन लोगों के तीर और भाले इन तक नहीं पहुंच पाए और फिर ये लोग जहाज बनाकर इन लोगों तक पहुंचने ही वाले.इन जहाज के लोगों ने एक रेडियो कॉल किया और उसके बाद एक हेलीकॉप्टर द्वारा इन लोगों को सुरक्षित निकाला गया और इस जहाज का सामान निकालने में 10 साल लग गए.

7.1991 में भारत के त्रिलोक नाथ पंडित अपने एक जहाज के जरिए लोगों तक पहुंचे और यह इतिहास में पहली बार हुआ था जब इन लोगों ने  किसी बाहरी आदमी पर हमला ना किया हो त्रिलोकनाथ पंडित ने इन लोगों को नारियल दिए जिनके कारण यह लोग बहुत खुश हुए क्योंकि इन लोगों को नारियल बहुत ज्यादा पसंद थे. और इस आइसलैंड के ऊपर नारियल नहीं होते हैं. जिसके कारण इन लोगों ने पंडित के ऊपर हमला नहीं किया.

8. 2004 में एक बार सुनामी आई थी जिससे बहुत ज्यादा तबाही हुई थी.और उससे अंडमान निकोबार में भी बहुत ज्यादा तबाही हुई थी.  और इसी के चलते इस प्रजाति को इस जनजाति को देखने के लिए भारतीय इंडियन एयर फोर्स के एलिट इंडियन एयरफोर्स का एक हेलीकॉप्टर इस आईसलैंड के ऊपर पहुंचा लेकिन इन लोगों ने उन के ऊपर तीर और भालो  से हमला कर दिया जिससे यह अनुमान लगाया गया कि यह लोग अभी भी सुरक्षित हैं.

9. और अब 2018 नवंबर 15/16 तारीख को एक और नई घटना सामने आई है जिसमें एक अमेरिकी टूरिस्टर जॉन एलेन चाउ कि इन लोगों ने तीर और भालो से हत्या कर दी वैसे तो यहां पर जाना मना है पाबंदी लगाई हुए हैं. लेकिन जॉन एलेन चाउ ने कुछ मछुआरों को पैसे खिलाकर यहां तक पहुंच गया.और फिर इसके बाद इन लोगों ने जॉन एलेन चाउ की तीर और भालो से हत्या कर दी जैसा कि यह लोग हर किसी को मार डालते हैं. लेकिन अब जॉन एलेन चाउ की लाश को भी वहां से लाना बहुत मुश्किल हो गया है. क्योंकि जब भी यह लोग अपने आसपास किसी बाहरी आदमी को देखते हैं. तो उसके ऊपर तीर और भालो से हमला कर देते हैं लेकिन फिलहाल उन मछुआरों को गिरफ्तार कर लिया गया है जो कि जॉन एलेन चाउ को वहां तक लेकर गए थे. अब यह जानना बहुत ही दिलचस्प होगा कि आखिरकार इन लोगों ने उसको वहां तक इंडियन नेवी से छुपाकर कैसे पहुंचाया.

10. वैसे तो यह माना जाता है कि यह लोग यहां पर लगा पिछले 60,000 सालों से रह रहे हैं और इन की संख्या लगभग 50 से 400 हो सकती है. और यह लोग इसी आइसलैंड के ऊपर रह कर अपना गुजारा करते हैं यह यहां पर होने वाले फलों को ही खाते हैं. इसके अलावा यह लोग तीर और भालो को चलाने में इतने तेज हैं इनसे यह अंदाजा लगाया से लगाया जा सकता है.हां यह बात जरूर है कि इन लोगों को शायद अभी तक खेती करना नहीं आता है. जो कि आदिमानव बहुत समय पहले भीही सीख चुके थे. लेकिन यह लोग सिर्फ शिकार करके ही खाते हैं.

तो आज हमने इस पोस्ट में नॉर्थ सेंटिनल द्वीप अंडमान उत्तर सेंटीनेल द्वीप sentinel islands उत्तर सेंटिनल द्वीप प्रहरी द्वीप नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड सेंटिनल आइलैंड इंडिया आइलैंड इन इंडिया उत्तर प्रहरी से सबंधित जानकारी दी है  तो यदि आपको यह पोस्ट पसंद आए तो लाइक और शेयर जरूर करें.और यदि आपका इसके बारे में कुछ सवाल या सुझाव है. तो आप नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं.

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.

+