6 तकनीक जो मनुष्य को अमर बना सकती है

6 तकनीक जो मनुष्य को अमर बना सकती है

अमर होने का नाम सुनते ही  एक झूठ सा लगता है  क्योंकि प्राचीन समय में इसके बारे में बहुत से बातें हुए हैं और बहुत सी जड़ी बूटीयां बताई गई है प्राचीन समय में ऐसी जिससे इंसान अमर हो सकता था पर भविष्य में विज्ञान चोरी करने की सोच रहा है और मौत दुनिया का सबसे बड़ा सच है और लोग इससे दूर जाने की कोशिश करते हैं|

हमने सुना है कि प्राचीन समय से ही मनुष्य हमने सुना है कि प्राचीन समय से ही मनुष्य अमर होने की तकनीकों पर काम कर रहा है वह ऐसी ऐसी तकनीकी ढूंढ रहा है कि जिससे यहां तो मनुष्य अमर हो सके यह वह बहुत समय तक जिंदा रह सके और विज्ञान में इसमें बहुत सी उपलब्धियां प्राप्त की है और वह काफी अंतर कामयाबी रही है और कहा जाता है कि भविष्य में व्य तकनीकी जरूर साकार हो जाएंगी|

1 . Longevity Pill

अपने भूख मिटने वाली गोली के बारे में तो सुना होगा पर कहा जा रहा है की भविष्य में ऐसी गोली तेयार की जा रही है जिस से इन्सान की उमर को बढ़ाया जा सकता है या उसको अमर बनाया जा सकता है जिसका नाम है Longevity Pill और  वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी गोली बनाई जा रही है जिससे इंसान जिससे इंसान की उम्र लंबी ही नहीं बल्कि वह गोली लेने से वह आम इंसान के मुकाबले ज्यादा स्वस्थ और तंदुरुस्त रहेगा वैज्ञानिकों का कहना है कि यह गोली सन 2019 तक बाजार में उपलब्ध हो जाएगी बाजार में उपलब्ध हो जाएगी .

अब इस गोली पर रिसर्च की जा रही है वैज्ञानिकों का कहना है कि यह गोली लेने से इंसान की उम्र दो अब 70 से 80 वर्ष है वह 100से 110 वर्ष तक हो जाएगी और इस गोली का एक मेन साल्ट है मेटफॉर्मिन जो अब डायबिटीज के मरीजों को दिया जाता है कम मात्रा में पर वही साल्ट इस गोली के अंदर डाला जाएगा वह वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल से डायबिटीज के मरीज आम इंसान के मुकाबले ज्यादा उम्र तक जीते हैं और इस गोली का प्रशिक्षण चूहों पर किया जा चुका है और अच्छे परिणाम मिले हैं तो वैज्ञानिक तौर पर कहते हैं कि यह गोली इंसान ऊपर उपयोग करने से पहले इस पर कुछ रिचार्ज और की जाएगी|

2 . Infusing Young Blood To Old

मतलब की युवा इंसान का खून ज्यादा उमर के इंसान के अंदर चढ़ाना विज्ञानिकों की सोच है कि जैसे वैंपायर के बारे में तो आपने सुना ही होगा और फिल्मों में देखा भी बहुत होगा वह इंसानों का खून चूसते हैं और युवा इंसानो का खून चूसते हैं जिसके कारण वे लंबी ऊपर तक देखते हैं .

शायद अमर भी हो जाते हैं इसके बारे में तो पता नहीं है लेकिन लेकिन विज्ञानिकों ने यह देखते हुए एक रिसर्च की की युवा चूहों का खून जो ज्यादा उम्र के चूहे थे उनके अंदर चढ़ा कर देखा तो वह अपनी औसतन आयु से 1 महीने ज्यादा जीते है तो वैज्ञानिकों ने यह प्रशिक्षण इंसानों पर करने की सोच रखी है यदि ऐसा संभव होता है तो इंसान अपनी औसतन आयु से ज्यादा उम्र तक जी सकेगा और और वैज्ञानिकों का कहना है कि यह भविष्य में  संभव हो सकता है |

3 . Organ Grown In Lab

वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसानों के शरीर के अंग प्रयोगशाला में ही प्यार किए जा सकते हैं और विज्ञानिक इस चीज पर बहुत ज्यादा रिसर्च कर रहे हैं और उन्हें उपलब्धि भी प्राप्त हुई है कई बारी इंसान को इसलिए जान से हाथ धो बैठना पड़ता है कि उनका शरीर का एक या दो अंग खराब हो जाए और वह नए मिले और यदि किसी दूसरे इंसान का वह अंग उस इंसान को लगाया जाए या तो उसके शरीर का ब्लड ग्रुप या कुछ चीज मैच नहीं करती .

यदि करती है तो भी इसके लिए किसी इंसान की अनुमति के बिना उसका अंग नहीं लिया जा सकता और शरीर के कुछ जटिल और महत्वपूर्ण अंग जैसे हृदय और बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है जिनकी जरूर पूरा करने के लिए या तो किसी इंसान के आकस्मिक मौत का होती है तभी दिया जा सकता है या कोई अपना अंग दान करे तभी दिया जा सकता है और उसको भी लगाने के लिए इंसान के अंदर ब्लड ग्रुप और उमर और बहुत कुछ चीजें देखी जा सकती है तभी वह उस इंसान को लगाया जा सकता है पर विज्ञानी कौन है कुछ समय पहले एक ऐसा प्रशिक्षण किया जिसमें एक इंसान की श्वास नली में कैंसर होने की वजह से उसे निकाल दिया और वह श्वासनली उसकी कोशिकाओं के द्वारा प्रयोगशाला में तैयार करके उसके अंदर लगा दी गई इसी कारण विज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में वह जटिल अंग दूसरे के लिए बहुत महत्वपूर्ण है उनको भी प्रयोगशाला में उगाया जा सकता है|

4 . 3D Printing Of Organs

प्रिंटर के द्वारा  प्रिंटिंग के बारे में तो हम सब ने सुना है और प्रिंटिंग का हर दिन किसी न किसी काम में तो प्रिंटिंग होती है चाहे किताबों में हो छाई न्यूज़पेपर में और और पहले और आज के प्रिंटिंग प्रिंटर में दिन रात का फर्क है सन 1436 में जोहानिस Gutenberg ने प्रिंटिंग की सुरुआत की और आज वैज्ञानिक जगत में प्रिंटिंग ने एक क्रांति ही लाकर खड़ी कर दी है पहले प्रिंटिंग ब्लैक एंड वाइट बनती थी फिर रंगीन प्रिंटिंग आए.

वैज्ञानिक प्रिंटर को इतने आधुनिक तरीके से बना दिया कि आज वैज्ञानिक जगत में 3 डी प्रिंटिंग की शुरुआत हो गई है और और वैज्ञानिक इस 3डी प्रिंटर के जरिए बड़े-बड़े रॉकेट के पुर्जे तक बना रहे हैं और वैज्ञानिक जगत ने इस 3डी प्रिंटर को एक और स्तर पर इस्तेमाल किया है और वह है इंसान के 3डी प्रिंटर के जरिए तैयार करना विज्ञानिक इस प्रिंटर में कुछ चेंज करके इसको ऐसा तेयार किया है कि वह इंसान के अंग बना सके वैज्ञानिकों ने प्रिंटर में इंक की जगह स्मार्ट जल और जीवित कोशिका में डालकर इंसानी अंग तैयार कर रहे हैं अभी तक विज्ञानिकों को इसमें कामयाबी भी मिली है और कुछ अंग तेयार भी हुए हैं वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में इंसान के सभी अंग 3डी प्रिंटर के जरिए तैयार कर दिए जाएंगे जिससे इंसानों के अंगों के कारण मौत नहीं होगी वह लंबे समय तक जी सकेंगे |

5 . Cyborg

Cybrog का मतलब है कि आधा इंसान आधा मशीन वैज्ञानिक एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जिससे इंसान के कुछ अंग मशीनों के जैसे बदले जा सकते हैं हमने फिल्म में तो बहुत देखा है कि इंसान के अंग मशीन जैसे है जैसे हाथ या पैर लेकिन विज्ञानिक इसे सच में करने के लिए सच में करने के लिए इस पर काम कर रहे हैं और वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ समय में इंसान के हाथ या पैर मशीनों की तरह बदल जाए अंग  खराब हो जाए तो मशीनों की तरह बदले जा सकेंगे और  वैज्ञानिकों ने हाथ और पैर तो बदल के प्रशिक्षण किया है और वह कामयाब भी रहा है वह केवल निर्जीव हाथ पैर नहीं बल्कि हमारे दिमाग से कंट्रोल किए जाएंगे जैसे हमारे असली हाथ पैर काम करते हैं और वैज्ञानिक कहते हैं कि भविष्य में शायद शरीर के सारे अंग कैसे बदले जा सकेंगे और जिस से इंसानों के अंगों के कारण मोत ने होकर वह लंबी उम्र तक जी सकेगे |

6 . Digital Immortality

कहा जाता है कि मृत्यु के बाद शरीर तो खत्म हो जाता है और आत्मा जिंदा रहती है पर वैज्ञानिक जगत किसको नहीं मानता यह सिर्फ कुछ कुछ लोगों का मानना है वैज्ञानिक जगत एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहा है कि इंसान का मृत्यु के बाद भी दिमाग को जिंदा रखा जा सके इस तकनीक को डिजिटल Immortality कहते हैं वैज्ञानिक जगत ऐसा करने के लिए आपके दिमाग को एक कंप्यूटर मीडिया पर अपलोड कर दिया जाएगा जिससे आपके दिमाग का सारा डाटा उसके अंदर चला जाएगा और आपके शरीर के मर जाने के बाद भी आपके दिमाग का डिजिटल ग्रुप जिंदा रहेगा यह अभी तक सिर्फ कल्पना की जा रही है वैज्ञानिक इस पर काम भी कर रहे हैं और वैज्ञानिकों का कहना है कि सन 2050 तक इंसान का दिमाग डिटेल डिजिटल को जिंदा रखा जा सकेगा यदि यह तकनीक कामयाब हुई तो इंसान का तो पता नहीं लेकिन इंसानी दिमाग को जरूर अमर बना दिया जाएगा|

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