मोहनजोदड़ो के इतिहास के बारे में रोचक जानकारी

मोहनजोदड़ो के इतिहास के बारे में रोचक जानकारी

हम दुनिया के बहुत ही पुराने पुराने इतिहास उनके बारे में पढ़ते आ रहे हैं और उनके बारे में और भी ज्यादा जानकारी लेने की कोशिश करते हैं और हम कई बार उनकी ऐसी खोज कर लेते हैं जो कि शायद पहले किसी ने भी नहीं की हो हमें वहां से ऐसी चीजें मिल जाती है जो कि हमने इस दुनिया में पहली बार देखी हो या इस दुनिया को हमने पहली बार उस चीज को खोज कर दिखाया हो ऐसी बहुत सी चीजें हमें पुरानी प्राचीनतम चीजों के अंदर मिल जाती है जहां पुराने इतिहास की जानकारी पाने के लिए हम इतिहास के कुछ ऐसी जगह पर जाते हैं जहां की बहुत पुराने समय पर लोग रहते थे वैसे दुनियाभर में बहुत से प्राचीन स्थान है लेकिन भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो कि दुनिया का सबसे पुराना देश है भारत के अंदर बहुत ही पुराने समय की चीजें पाई गई है और उसे अंदाजा भी लगाया गया कि भारत बहुत ही पुराना देश है

वैसे तो भारत के अंदर बहुत से राज्यों के अंदर बहुत सी अलग अलग तरह की प्राचीन चीजें या प्राचीन प्रमाण मिले हैं जैसे कि यह साबित होता है भारत एक बहुत ही प्राचीन देश है और वहां पर बहुत सी चीजें निकाली भी गई है जिससे कि यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत आज से बहुत पहले समय का है और लगभग दुनिया में भारत के अलावा किसी भी देश का इतना पुराना इतिहास नहीं मिल पाया है भारत के अंदर पहले पाकिस्तान अफगानिस्तान श्रीलंका बांग्लादेश जैसे देश भारत का ही टुकड़ा है पहले सभी देश भारत के अंदर होते थे लेकिन बाद में इनको अलग कर दिया गया और उसके कारण भारत की ऐसी बहुत सी प्राचीन चीजें हैं जो कि अब इन देशों के अंदर है लेकिन फिर भी भारत के अंदर बहुत ही प्राचीन समय की चीजें मिलती है और उन चीजों के कुछ प्रमाण दूसरे देशों में भी मिलते हैं भारत और पाकिस्तान के अंदर प्राचीन समय की मोहनजोदड़ो दुनिया भर में प्रसिद्ध है और यह कोई आज की सभ्यता से संबंधित नहीं है क्योंकि यहां पर लोगों ने अपनी एक अलग ही दुनिया बसाई हुई थी

जो कि आज से लगभग 4600 हजार साल पहले की बात है वह उस समय के कुछ ऐसे प्रमाण मिले हैं जिससे कि यह साबित होता है कि वहां पर उस समय भी लोग खेती करते थे और अपने मकान बनाते थे और अपने खुद के बनाए बर्तनों का इस्तेमाल करते थे और वह उनकी दुनिया हुआ करती थी ऐसी बहुत सी चीजों के प्रमाण मोहनजोदड़ो के अंदर मिले हैं तो आज हम आपको इस पोस्ट में मोहनजोदड़ो से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी बताएंगे वैसे तो आपको कहीं पर भी इस तरह की जानकारी मिल जाएगी लेकिन शायद आपको पूरी और विस्तार से जानकारी कभी भी ना मिल पाए हो क्योंकि बहुत सी चीजें ऐसी है मोहनजोदड़ो के अंदर जो कि आप नहीं जानते हैं तो आज हम आपको मोहनजोदड़ो के बारे में इस पोस्ट में मोहनजोदड़ो कहा है मोहनजोदड़ो की खुदाई मोहनजोदड़ो का अंत मोहनजोदड़ो की सभ्यता मोहनजोदड़ो फिल्म की कहानी मोहनजोदड़ो का स्नानागार मोहनजोदड़ो कहाँ स्थित है मोहनजोदड़ो की खोज किसने की पूरी जानकारी विस्तार से बताएंगे.

मोहनजोदड़ो का इतिहास

सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि मोहनजोदड़ो क्या है और मोहनजोदड़ो नाम इसका क्यों पड़ा शायद आप को पता भी होगा और अगर नहीं पता है तो मैं आपको बता देता हूं मोहनजोदड़ो का मतलब होता है मुर्दों का टीला

और यह एक शहर का नाम है दक्षिण एशिया के अंदर बसे इस शहर को दुनिया का सबसे पुराना शहर माना जाता है इतने पुराने समय में और इस इतने पुराने शहर को इतने बढ़िया तरीके से बनाया गया है और इसकी कल्पना भी आप शायद नहीं कर सकते क्योंकि अगर आप इसको देखते हैं तो आपको इतने पुराने समय में इतने अच्छे तरीके से बनाए गए हुए घरों को और इस बसाए गए शहर का विश्वास नहीं होगा आप हैरान हो जाओगे इस शहर को देखकर यह शहर पाकिस्तान के सिंध में लगभग 4600 साल पहले बनाया गया था इसके अंदर बड़ी-बड़ी इमारतें जलकुंड सुंदर-सुंदर चित्र कार्य मिट्टी व धातु के बनाए गए बर्तन मुद्राएं मूर्तियां और पत्थर से तराश कर बनाई गई मूर्तियां और भी बहुत सी चीजें इस शहर के अंदर मिली हैं जिससे हमें यह पता चलता है कि यह एक साफ-सुथरा और सही ढंग से रहने वाला और अच्छे और सुचारु तरीके से बनाया गया शहर है.

जिस तरह आज हम अपने खुद के लिए एक घर बनाते हैं और हम आज के समय में घरों में रहते हैं उसी तरह से 4600 साल पहले भी लोग अपने खुद के लिए घर बनाते थे और उसके अंदर रहते थे खेती भी किया करते थे और मिट्टी के नीचे दबे हुए इस शहर के रहस्य के बारे में जानने के लिए बहुत से लोग उत्साहित है और शायद आप भी इस बात के लिए उत्साहित हो गए होगे कि हमें इस शहर के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए और इन रहस्यों को जानने की कोशिश करने वाले लोगों के कारण कई बार इस शहर की खुदाई भी शुरू भी की गई और उसके बाद कई बार इसकी खुदाई बंद भी कर दी गई यह शहर 200 हेक्टेयर में बसा हुआ है और अब तक माना जाता है कि इस का मात्र एक तिहाई भाग का ही खुदाई किया गया है प्राचीन सभ्यताओं के कारण ही पाकिस्तान को नेशनल आइकन भी माना जाता है

सन 1856 ईस्वी में एक अंग्रेज इंजीनियर ने इस मोड मोहनजोदड़ो शहर की खोज की थी रेलवे ट्रैक को बनाते समय इस इंजीनियर ने पत्थर और को तरस रहा था ताकि वह इन पत्थरों को तोड़कर छोटी-छोटी गिट्टियां बना सके तो उस समय उस अंग्रेज इंजीनियर को यहां पर बहुत ही पुरानी और मजबूत से मजबूत इन टैब मिली सीटें ईट मिली जो देखने में बिल्कुल आज की ईंट की तरह ही दिखाई देती थी वहां के एक आदमी ने उनको बताया कि यहां पर सभी घर इन्हीं ईटो से बनाए गए हैं जो इन्हें खुदाई के दौरान मिलते हैं फिर उसके बाद वह इंजीनियर समझ गया कि यह कोई मामूली ईंट नहीं है और ना ही यह साधारण यह है यह कोई प्राचीन शहर या प्राचीन गांव की बसी   बस्तियां के घरों की ईंटे हैं फिर इस इंजीनियर को सबसे पहले सिंधु घाटी के पास सिंधु घाटी की सभ्यता के बारे में पता चला सिंधु नदी के पास होने के कारण इसका नाम सिंधु घाटी सभ्यता रख दिया गया और इस प्राचीन सभ्यता के समय एक और सभ्यता में निवास करती थी जो Egypt में स्थित थी यह बात पुरातत्वविद विज्ञानियों द्वारा बताई गई है सिंधु घाटी सभ्यता 2600 ईसा पूर्व से 3000 ईसापूर्व तक रही थी इस प्राचीन सभ्यता कुछ अर्बन सेंटर भी थे जैसे मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी और मोहनजोदड़ो इन सभी शहरों के अंदर सबसे विकसित शहर था.

इसलिए पुरातात्विक वैज्ञानिकों ने सबसे पहले इसकी खुदाई शुरू की थी और इसके बारे में और इसके बारे में अधिक जानकारी इकट्ठी करनी शुरू कर दी इसके बाद हड़प्पा एक ऐसा शहर था जो व्यवस्थित हुआ जिसको अग्रिम ढंग से बनाया गया था मोहनजोदड़ो को देखकर ऐसा लगता है कि यह शहर किसी सफल इंजीनियर ने बनाया है लेकिन इसको कारीगरों द्वारा बनवाया गया था 1900 ईसा पूर्व सिंधु घाटी सभ्यता का पतन हो गया और मोहनजोदड़ो भी मिट गया इंसान के अंदर रहने वालों का तो पता नहीं लेकिन इन को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे कि इसका पूरी प्लानिंग के साथ इसका निर्माण किया गया था शहर की चारों वेदों की मोटी दीवार बनाई हुई थी जो कि शहर  की रक्षा के लिए बनवाई गई थी इसके साथ ही पता लगाया गया कि कुछ लोग ईद के घरों में भी रहते थे जो कि तीन तीन मंजिल बनी हुई थी लेकिन इतना भी नहीं इसके अलावा कुछ करोगे तो बाथरूम भी मिले और पानी निकास के लिए नालियां बनी हुई थी

ऐसा माना जाता है कि दुनिया में पहली नाली का निर्माण यहीं से शुरु हुआ था पुरातात्विक वैज्ञानिकों के अनुसार यहां के लोग खेती भी किया करते थे उन को गेहूं  चावल उगाना अच्छी तरह से आता था इतना ही नहीं लोग जानवरों को भी पालते थे भारतीयों द्वारा मोहनजोदड़ो की खोज 1922  राखल दास बनर्जी जो पुरातत्व सर्वेक्षण के सदस्य थे पाकिस्तान में सिंधु नदी के पास काम किया था खुदाई का काम किया था उन्हें वह बुद्ध का सतूप सबसे पहले दिखाई दिया जिसके बाद उन्होंने वह भरोसा जताया कि यहां पर नीचे कुछ जरूर इतिहास दबा हुआ है इस खोज को आगे बढ़ाते हुए सन 1924 ईस्वी में काशी नाथ नारायण और सन 1995 में जॉन मार्शल ने खुदाई का काम करवाया था सन 1985 तक इसे भारत के अलग-अलग लोगों की कमांड में करवाया गया लेकिन इसके बाद इस खोज को बंद करवाना पड़ा इसका कारण यह बताया गया है कि खुदाई की वजह से प्रकृति को नुकसान हो रहा है

मोहनजोदड़ो की विशेषता

मोहनजोदड़ो की विशेषता खोज के दौरान पता चला कि यहां के लोग गणित का भी ज्ञान रखते थे इनको जोड़ घटाना गुणा करना सब कुछ आता था जो अलग अलग शहर में इस्तेमाल हुआ था वह सभी एक एक ही भजन एक ही साइज की थी जैसे यह सभी एक ही सरकार के द्वारा बनाया गया हो पुरातत्विक वैज्ञानिकों के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता के लोग गाने बजाने खेलने-कूदने यह भी बहोत ही शौकीन थे उन्होंने कुछ म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट और खिलौनों को भी खोज निकाला था इतना ही नहीं वह लोग साफ-सफाई पर भी पूरा ध्यान देते थे पुरातत्विक वैज्ञानिकों को साबुन कंघी दवाइयां भी मिली थी उन्होंने दांतों का परीक्षण किया तो उनके परिणाम कुछ हैरान कर देने वाले थे उस समय के लोग भी आज की तरह ही नकली दांतो का इस्तेमाल करते थे मतलब यह हुआ कि प्राचीन सभ्यता में डॉक्टर भी हुआ करते थे खोजकर्ताओं को धातु के गहने और उनके कपड़े भी मिले थे यह कहने आज भी म्यूजिक में रखे गए हैं.

इसके अलावा चित्रकारी मूर्तियां सिक्के दिए और इसके अलावा और भी कुछ हो जाए मिले हैं जिसे दुनिया भर के संग्रहालय में रखा गया है खुद के दौरान पता चला है कि मोहनजोदड़ो के लोग खेती भी किया करते थे वह उनके गेहूं के काले दाने आज भी आज भी संभाल कर रखे गए हैं कुछ लिपिक भी मिले हैं जैसे कि पता चलता है कि इनको पढ़ना लिखना भी आता था और उस समय के लोग सोने चांदी के गहने भी पहनते थे माना जाता है कि प्राचीन सभ्यता में 50 लाख लोग रहते थे जो कि एक भूकंप में पूर्णतया नष्ट हो गए अभी पुरातात्विक विज्ञानिक और भी खोज में लगे हैं और भी इस बात को जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इस शहर का निर्माण किस तरह से हुआ और उन हो उनके अंदर रहने वालों ने कैसी इतनी बड़ी सभ्यता का विकास किया  और इसका अंत कैसे हुआ क्या कारण था कि यह सभ्यता मिट्टी के नीचे दब गई और इन सभी चीजों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पुरातात्विक विज्ञानिक आज भी खोज में लगे हुए हैं और हमें तरह-तरह की खोजें मोहनजोदड़ो के अंदर कर रहे हैं.

और मोहनजोदड़ो बहुत दूर दूर तक फैली है और इसके अंदर और भी ऐसी बहुत सी जानकारी मिलेंगी जो कि हमें पिछले 4600 साल पहले के लोगों के बारे में और भी बहुत सी जानकारी देगी इसके अंदर हमें वह सबूत मिल सकते हैं और यह अभी पुरातत्विक वैज्ञानिक खोज करके हमें बता भी सकते हैं क्योंकि यह सुरक्षित तरीके से बनाया गया शहर था और इसके अंदर सभी तरह की चीजें मिलती थी चोकी आज के समय में मिलती भी नहीं होगी इसके अंदर साफ सफाई का पूरा ध्यान रखा गया नालियां बनाई गई शहर की सुरक्षा के लिए चारों और दीवारे बनाई गई पानी के लिए कुंड बनाए गए अच्छी-अच्छी दीवारों से घर भी बनाए गए और सभी चीजों को ध्यान में रखा गया तो यह एक बहुत ही अच्छा शहर था और हम आशा करते हैं कि आने वाले समय में इसके बारे में हमें और भी बहुत सी जानकारी मिलेगी लेकिन आज की पोस्ट में बस इतना ही.

तो आज हमने आपको इस पोस्ट के अंदर एक बहुत ही बढ़िया और अच्छी जानकारी दी है मैं आशा करता हूं कि आपको यह जानकर बहुत ही पसंद आई हुई क्योंकि हमने आज आपको इसके अंदर एक ऐसी जानकारी बताई है जो कि शायद आप पहले नाम ही सुना होगा लेकिन उसके बारे में इतनी जानकारी नहीं प्राप्त कर पाए होंगे क्योंकि हमने आज से 600 साल पहले के मोहनजोदड़ो शहर के बारे में आपको बहुत ही अच्छी जानकारी दी और यह दुनिया का सबसे पुराना और सबसे अच्छा शहर था इसके अलावा इसके और भी शहर थे जैसे सिंधु राखीगढ़ी लेकिन इन सब में सबसे ज्यादा और सबसे अच्छा शहर मोहनजोदड़ो ही था

और मोहनजोदड़ो के अंदर बहुत ही पुरानी चीजें आज के समय में मिली है और अब तक इसकी खोज बढ़ती ही जा रही है कई बार इसकी खुदाई को बंद भी कर दिया जाता है लेकिन फिर से दोबारा शुरू कर दिया जाता है लेकिन हम आशा करते हैं आगे आने वाले समय में हमें उन लोगों के नष्ट होने के बारे में जरूर पता चल जाएगा तो इस पोस्ट में आपको हमने  मोहनजोदड़ो कहा है मोहनजोदड़ो की खुदाई मोहनजोदड़ो का अंत मोहनजोदड़ो की सभ्यता मोहनजोदड़ो फिल्म की कहानी mohenjo daro an ancient city  mohenjodaro n harappa  mohenjo daro movie the great bath at mohenjo daro मोहनजोदड़ो का स्नानागार मोहनजोदड़ो कहाँ स्थित है मोहनजोदड़ो की खोज किसने की मोहनजोदड़ो की सभ्यता मोहनजोदड़ो की विशेषता और मोहनजोदड़ो के इतिहास के बारे में जानकारी दी है तो यदि आपको यह जानकारी पसंद आए तो शेयर करना ना भूलें और यदि आपका इसके बारे में कोई सवाल है सुझाव हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं.

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