भारत तिरंगा किसने बनाया राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास

भारत तिरंगा किसने बनाया राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास

दुनिया में सभी देशों का अपना एक-एक अलग-अलग राष्ट्रीय चिन्ह, राष्ट्रीय पक्षी ,राष्ट्रीय पशु, गीत, राष्ट्रीय ध्वज ,फूल , मिठाई , सभी देशो की ये एक एक राष्ट्रीय चीजें होती है और उन चीजों को देश की सबसे अच्छी चीजों में से चुनकर राष्ट्रीय चीजें बनाई जाती है जो कि देश के लोगों को सबसे ज्यादा चीज अच्छी लगती है उसे ही राष्ट्रीय चीज बनाया जाता है और सभी देशों का एक राष्ट्रीय ध्वज भी होता है जो कि किसी देश की निशानी होती है और सभी देशों का अपना एक अलग अलग राष्ट्रीय ध्वज होता है इसी तरह ही भारत का भी एक राष्ट्रीय ध्वज है जिसे हम तिरंगे के नाम से जानते हैं और यह भारतीय लोगों की शान माना जाता है और दुनिया के सभी देशों के अलग-अलग राष्ट्रीय ध्वज होते हैं तो आज हम आपको इस पोस्ट के अंदर भारतीय ध्वज के बारे में बातें करेंगे हम आपको इस पोस्ट में भारत के राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास के बारे में बताएंगे कब से लेकर कब तक राष्ट्रीय ध्वज बनाए गए और कितने बदलाव इन राष्ट्रीय ध्वज में किए गए

क्योंकि हमारे देश के ध्वज का इतिहास बहुत पुराना है और यह समय समय पर बदलते रहे और इनके अंदर कभी कुछ कभी कुछ कभी किसी तरह का कभी किसी तरह का बदलाव होता रहा जिसके कारण हमारे देश का राष्ट्रीय ध्वज एक नहीं रह सका लेकिन अब आजादी के बाद सिर्फ हमारे देश का एक ही राष्ट्रीय ध्वज है उस राष्ट्रीय ध्वज को हमारे देश के लोग तिरंगा कहते हैं और यह आपको हमारे देश की सभी सरकारी चीजों के अंदर आपको मिल जाएगा जैसे कि संसद भवन, कोर्ट ,सुप्रीम कोर्ट ,या किसी सरकारी ऑफिस या किसी सरकारी संस्था यंहा आपको हमारे देश का तिरंगा लहराता हुआ मिल जाएगा. तो हम आपको इस पोस्ट में हमारी तिरंगे के इतिहास के बारे में पूरी जानकारी और रोचक तथ्य इसके अंदर इस पोस्ट में बताएंगे तो निचे आप हमारे देश के तिरंगे के बारे में जानकारी जरुर पढ़े.

भारत के राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास

हमारे देश की आजादी के समय में अलग-अलग तरह के ध्वज का इस्तेमाल किया गया था  सबसे पहले भारत में 7 अगस्त 1906 को कोलकाता के ग्रीन पार्क में ध्वज फहराया गया था. इसके अंदर तीन रंग थे सबसे ऊपर हरा बीच में पीला और नीचे लाल रंग था हरे रंग के ऊपर कमल के फूल के निशान थे बीच में पीले रंग के ऊपर वंदे मातरम लिखा हुआ था और सबसे नीचे लाल रंग के ऊपर एक चांद और सूरज का चित्र बना हुआ था.

image source :- wikipedia.org

 

उसके बाद 1907 में मैडम कामा ने जर्मनी के Stuttgart दूसरी इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस सभा में फहराया गया था जो की पहले वाले झंडे की तरह ही था बिल्कुल वैसा ही लेकिन इसके अंदर छोटे – मोटे बदलाव किए गए थे.और सब कुछ पहले ध्वज जैसा था. उसके बाद 1917 में एक और ध्वज बनाया गया यह ध्वज पहले बनाए गए दोनों ध्वजों से बिल्कुल अलग एक नया ध्वज था इसके अंदर पांच लाल रंग की और चार हरे रंग की पट्टी लगाई गई थी और इसके अलावा इसके अंदर 7 स्टार को लगाया गया था और एक चांद को लगाया गया था . यूनियन चैक के साथ इसको बनाया गया था 1921 में गांधी जी को विजयवाड़ा के रहने वाले नौजवानों ने एक ध्वज डिजाईन करके दिया जो की पहले वाले तीनों ध्वज से बिल्कुल अलग था .

Image Source :- wikipedia.orgइसके अंदर सिर्फ लाल और हरा 2 ही रंग लगाए गए थे  लाल रंग हिंदू और हरा कलर मुस्लिम को दर्शाता था लेकिन गांधीजी ने कहा कि इसके साथ सफेद कलर को और जोड़ दिया जाए ताकि बाकी सभी धर्मों के लोगों को सफेद रंग दर्शाए और इस झंडे को पहले वाले तीनो ध्वज से अलग डिजाईन किया गया था इस ध्वज में  इसके अंदर चरखे के निशान को लगाया गया था और यह चरखा ध्वज के अंदर लगाने का तरीका हंसराज जी का था लेकिन इस झंडे का डिजाइन करने के बाद इसको बनाने का काम महात्मा गांधी जी ने पिंगली वेंकय्या जी को दिया.

लेकिन यह ध्वज इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी का प्रतीक था जो कि पूरे भारत के अंदर इस्तेमाल किया गया  इतिहासकार Trevor Royal ने अपनी बुक The Last  Days Of The Raj में लिखा आज के समय में जो हम ध्वज इस्तेमाल करते हैं उसका डिजाइन हैदराबाद की सुरैया जी ने किया था जो कि बदरुद्दीन तैयब जी की पत्नी थी. 1947 के अंदर कांग्रेस पार्टी के ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज बनाने की कोशिश की गई लेकिन प्राइम मिनिस्टर ऑफिस के ऑफिसर बदरुद्दीन तैयब जी की पत्नी  चरखा लगाने के बदल ध्वज के अंदर अशोक चक्र को लगाना चाहिए क्योंकि चरखा एक पार्टी का निशान था इसलिए बदरुद्दीन तैयब जी की पत्नी ने अशोका चक्कर को लगाना चाहती थी और इसके बाद छोटे मोटे बदलाव करने के बाद केसरिया सफेद और हरा रंग में लगाया गया और उसके बीच में  नीले रंग का अशोका चक्कर लगाकर इसका डिजाइन तैयार किया गया और फिर इस ध्वज को तैयार करवाया गया और उसके बाद इसे राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया गया और तब से लेकर आज तक यही हमारा राष्ट्रीय ध्वज है.

हमारे राष्ट्रीय ध्वज के अंदर तीन रंग है सबसे ऊपर केसरिया बीच में सफेद और नीचे हरा रंग है हमारे राष्ट्रीय ध्वज की चौड़ाई और लंबाई 3:2 है सबसे ऊपर केसरिया रंग देश की ताकत और साहस को दर्शाता है बीच में सफेद पट्टी धर्म चक्र शांति और सत्य का संकेत लोगों को देती है और सबसे नीचे हरा रंग यह रंग देश के शुभ विकास और उर्वरता को दर्शाता है बीच में अशोक चक्र के अंदर 24 तिलिया है.

तिरंगे के रंगों का अर्थ

केसरिया रंग :- भारत के राष्ट्रीय ध्वज में आप को सबसे ऊपर केसरिया रंग देखने को मिलता है जोकि बलिदान का प्रतीक होता है और इसी के साथ साथ ही यह हिंदू बौद्ध और जैन जैसे धर्मों के लिए भी माना जाता है .
सफेद रंग :- राष्ट्रीय ध्वज के बीच में हमें सफेद रंग देखने को मिलता है जो कि शांति और शुद्धता का प्रतीक है .
हरा रंग :- राष्ट्रीय ध्वज का हरा रंग खुशहाली समृद्धि और प्रगति का प्रतीक है और यह रंग भारत की धरती को हरियाली के रूप में दिखाने का भी काम करता है.

राष्ट्रीय ध्वज में हमें अशोक चक्र भी देखने को मिलता है जिसमें आपको 24 तीलियां देखने को मिलेगी जो कि दिन के 24 घंटों को दर्शाता है और यह समय की बहुमूल्यता का प्रतीक है.

इस पोस्ट में आपको भारत के राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास राष्ट्रीय ध्वज संहिता भारत के राष्ट्रीय ध्वज को पहली बार कब प्रदर्शित किया गया राष्ट्रीय ध्वज फहराने के नियम हमारे राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध तिरंगा का इतिहास ध्वज संहिता मराठी तिरंगे का जन्मदिन तिरंगे के रंगों का अर्थ के बारे में बताया गया है .यदि आपको यह जानकारी पसंद आए तो शेयर करना ना भूलें और यदि आप का इसके बारे में कोई सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं.

3 Comments
  1. Rajesh yadav orchha azadpura m.p says

    PARTY KE TOR PAR BADLE JATE THE AB KYO NAHI BADALTE H AB BHI TO PARTY YA CHANGE HOTI H

  2. Krishna says

    माहत्मा गाँधी सत्याग्राह आनदोलन चम्पारण से ही क्यु शुरु किय!?

  3. sanjay kumar says

    Tirange ke white patti ke chakra ko ashok chakra hi kyon kahate hain

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