पेट में इन्फेक्शन क्यों होता है और इन्फेक्शन के घरेलू उपाय

पेट में इन्फेक्शन क्यों होता है और इन्फेक्शन के घरेलू उपाय

पेट में इन्फेक्शन एक बहुत ही दर्दनाक बीमारी है इस बीमारी में पेट और आंतों (जठरांत्र संबंधी मार्ग) में जलन और सूजन हो जाती है और इस बीमारी को गैस्ट्रोएन्टराइटिस भी कहते है यह बीमारी अनियमित दिनचर्या व गलत खान-पान हैं और बार हो जाये तो जल्दी सी ठीक नही होती है क्योकि इसमें बहुत ज्यादा दस्त और  उलटिया आती है और पेट में कुछ ना होने  पर भी बार बार दस्त आते है इसे बीमारी को पेट का फ्लू भी कहा जाता है क्योकि  ये फ्लू की तरह केवल वायरस के कारण ही नहीं होता इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं. जैसे बैक्टीरिया और अन्य परजीवी किसी भी कारण से यह हो सकता है |

लेकिन खाने पीने का सबसे अधिक फर्क पड़ता है क्योकि यह पेट की बीमारी है और सक्रमण वाली बीमारी है यदि मल या उलटी करने के बाद हाथ अच्छे से साफ़ न किये जाये तो यह बीमारी दूसरो को भी हो सकती है और इस बीमारी के कारण उत्पन्न हुई स्थिति बहुत दिनों तक समस्या करती है इस लिए इस बीमारी से दूर रहे उतना ज्यादा फायदा है आज हम यंहा आपको बतायेंगे की आप कैसे इस बीमारी से बाख सकते है और इस बीमारी के क्या क्या कारण है और इसके लक्षण क्या क्या है |

पेट में इन्फेक्शन के प्रकार – Types of Stomach Infection in Hindi

पेट में इन्फेक्शन या गैस्ट्रोएन्टराइटिस  के मुख्य रूप से दो प्रकार होते है|

वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस – वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस एक संक्रामक बीमारी है यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से या दूषित भोजन अथवा पानी के माध्यम से हो सकती है और इस बीमारी को “पेट फ्लू” के नाम से जाना जाता है |

बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस – बैक्टीरिया गैस्ट्रोएन्टराइटिस वायरस संक्रमण के कारण होता है यह बीमारी अच्छे से साफ़ सफाई ना रखने से होती है  या यदि किसी बीमार जानवर के सम्पर्क में आ जाते है तो यह बीमारी हो जाती है |

पेट में इन्फेक्शन के लक्षण – Gastroenteritis Symptoms in Hindi

यदि पेट में इन्फेक्शन होता है तो सबसे पहले पेट में दर्द और दस्त उलटी सबसे ज्यादा होती है और इनसे ज्यादा कुछ लक्षण दिखाई नही देते है और कई बारी पेट में मरोड़ भी हो सकती है। संकेत और लक्षण आमतौर पर संक्रामक पदार्थ के संपर्क में आने के 12-72 घंटे बाद शुरू होते हैं और इसी के बाद बीमारी का पता चलता है |

  •  मल में रक्त बहुत ज्यादा आता है |
  • दस्त हो जाते है
  •  शरीर में कमजोरी आ जाती है भूख में कमी
  • उल्टी और मतली बार बार होती है
  • पेट में ऐंठन और दर्द होने लगता है |
  •  बहुत बारी बुखार आती है |

पेट में इन्फेक्शन के कारण Stomach Infection Causes in Hindi

पेट की समस्या सबसे ज्यादा कुछ गलत खाने पीने से होती है और यदि अच्छा खाना खाते रहे और अपने आप को साफ़ सुथरा रखे तो ऐसी बीमारी जल्दी सी नही आती है और शरीर भी स्वस्थ रहता है और कुछ और कारण भी होते है जिस से यह बीमारी हो सकती है वायरसऔर एस्चेरिचिया कोलाईऔर कैम्पिलोबैक्टर बैक्टीरिया प्रजातियां पेट में इन्फेक्शन का मुख्य कारण है और ये बहुत सी चीजे खाने से शरीर तक पहुंच जाते है और पेट में इन्फेक्शन का कारण बनते है|

वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस- जब भी कोई दूषित चीज का सेवन करते है या किसी भी संक्रमित व्यक्ति के साथ भोजन या कोई भी चीज शेयर करते है तो वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस से संक्रमित हो जाते है जिस से पेट का इन्फेक्शन आम बात है और गैस्ट्रोएन्टराइटिस के लिए कई प्रकार के वायरस होते है लेकिन दो वायरस बहुत ज्यादा संक्रमित करते है जैसेः नोरोवायरस ,रोटावायरस

बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टराइटिस-यह दूषित भोजन से होते है कई बारी भोजन खुले में पड़ा रहता है तो वह दूषित हो जाता है क्योकि उसमें बैक्टीरिया बहुत ज्यादा हो जाते है और कुछ चीजे ऐसी होती है जिनका हम हर दिन इस्तेमाल करते है और उनमे सबसे ज्यादा यह चीज होती है जैसेः

  • कच्चे अंकुरित अनाज (स्प्राउट्स; sprouts)
  • बिना उबला दूध या उससे बनी चीज़
  • फल और सब्ज़ियों का रस।
  • कच्चा या अधपका मांस, मुर्गा, समुद्री भोजन, अंडे

गैस्ट्रोएन्टराइटिस (जठरांत्र शोथ) से बचाव – Prevention of Gastroenteritis in Hindi

यदि ऐसे रोगों से बचना है तो अपने खाने पिने से रहने सहने तक सब ध्यान रखना पड़ेगा और कुछ बातो का ध्यान रखे तो ऐसी बीमारियों से दूर रहा जा सकता है |

खाना खाने से पहले और शोच करने के बाद हाथो को अच्छे से साबुन से साफ करे- यदि सदा अच्छे से हाथो को साफ़ करके खाना खाये और टॉयलेट जाने के बाद सबुन से अच्छे से हाथ साफ़ करे तो बहुत सी बीमारियों से बचा जा सकता है और ऐसी बीमारी जो संक्रमित में आने से होती है उनसे बचा जा सकता है |

संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें –  यदि किसी व्यक्ति को कोई भी ऐसी बीमारी हुई है तो कोशिश करे की उसके सम्पर्क में ना आये और उसकी कुछ भी चीजे इस्तेमाल न करे |

अपने बच्चे को टीका लगवाएं- यदि अपने बच्चो को बचपन में गैस्ट्रोएन्टराइटिस से बचाव के लिए इंजेक्शन लगवाए  एक साल की उम्र में बच्चे को यह टीका लगाया जाता है  इस से बीमारी के गंभीर लक्षणों को रोका जा सकता है|

निजी वस्तुओं का उपयोग करें और साफ़ करे-यदि घर की इस्तेमाल की चीजे को अच्छे से साफ़ करे और उनका हर रोज इस्तेमाल करते रहे |

दूषित भोजन का सेवन करे-यदि कंही भी बहार भोजन करते है तो ध्यान से देखे वह अच्छे से साफ़ और संतुलित है यदि कई देर रखा भोजन करते है करते है तो यह बीमारी हो सकती है |

गैस्ट्रोएन्टराइटिस का परीक्षण – Diagnosis of Gastroenteritis in Hindi

गैस्ट्रोएन्टराइटिस या पेट के इन्फेक्शन का समय पर इलाज करवाया जाये तो इनको जल्दी ठीक किया जा सकता है लेकिन यदि समय पर इलाज न किया जाये तो इस से बहुत सी बीमारी हो सकती है इसलिए यदि पेट के इन्फेक्शन  हुआ है तो डॉक्टर के पास जाये डॉक्टर अक्सर लक्षणों को देख कर और शारीरिक परीक्षण के आधार पर इलाज करता है |

पेट में इन्फेक्शन का इलाज – Stomach Infection Treatment in Hindi

पेट में इन्फेक्शन का इलाज यदि समय पर करवा लिए जाये तो आराम से हो जाता है लेकिन यदि ज्यादा समय लगा जाता है तो बहुत ज्यादा समस्या हो जाती है इस लिए पहले यदि थोड़ी प्रोब्लम है तो घरेलू ईलाज करके देखे यदि कोई असर ना हो उसी डॉक्टर के पास जाये और डॉक्टर जो कहे उसकी सलाह ले  |

यदि पेट में  इन्फेक्शन  हुआ है तो सबसे ज्यादा शरीर में पानी की कमी होती है इसलिए समय समय पर पानी पीते रहे और ज्यादा गंभीर हो जाये तो हॉस्पिटल भर्ती कराना जरुरी हो जाता है |

गैस्ट्रोएन्टराइटिस के लिए चिकित्सकीय उपचार- 

  • यदि बहुत ज्यादा उलटी आ रही है और शरीर में बहुत ज्यादा पानी की कमी होती जा रही है तो डॉक्टर सीधा नस में नली लगाकर द्वारा शरीर में तरल की पूर्ति (रिहाइड्रेशन) कर सकता है |
  • यदि छोटे बच्चे को निर्जलीकरण हुआ है तो सबसे पहले मौखिक रिहाइड्रेशन थेरेपी देने का प्रयास करना चाहिए यदि इस से कोई भी फर्क  ना पड़े तो बाद में आईवी (IV) से तरल दिया जा सकता है  इस से  कम से कम 5 मिलीमीटर घोल बच्चे को थोड़ी-थोड़ी देर बाद पिलाएं। इससे बच्चे के शरीर में पानी की कमी को दूर किया जा सकता है|

गैस्ट्रोएन्टराइटिस  के लिए दवाएं-   

यदि पेट में इन्फेक्शन हो जाये तो सबसे पहले सब टेस्ट किया जाता है और टैब तक कोई एंटीबायोटिक दवाइयां नही दी जा सकती है जब तक बैक्टीरिया की पहचान नही हो जाती है और पता चलने के बाद दवाई दी जाती है और कुछ दवाई पेट इन्फेक्शन के लिए जैसे  कैम्पिलोबैक्टर (Campylobacter), शिगेला (Shigella) और विब्रियो कॉलेरी (Vibrio Cholerae) आदि |

पेट के इंफेक्शन से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय

हल्‍दी का सेवन करे- एंटीबॉयोटिक गुण से भरपूर  हल्दी से सभी रोगों का इलाज है यह पेट में होने वाले संक्रमण को दूर करने का सबसे अच्छा प्राकृतिक उपचार माना जाता है। पेट में होने वाले संक्रमण को दूर करने के लिए 1 चम्‍मच हल्‍दी के पाउडर में 6 छोटे चम्‍मच शहद मिलाकर इसे एक हवा बंद जार में सुरक्षित रूप से रख लें। फिर इसे रोज दिन में दो बार आधा-आधा चम्‍मच खाएं कभी पेट की कभी बीमारी नही होगी

केला का सेवन करे- केला भी पौष्टिक तत्वों भरपूर होता है और यह पेट के लिए काफी इसके सेवन करते रहने से भोजन आसानी से पच जाता है।

लौंग भी पेट के लिए अच्छी होती है-लौंग बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए सबसे अच्छी दवाई है और अलावा पेट संबंधी समस्याओं से भी छुटकारा देने का सबसे अच्छा उपचार माना जाता है।

लहसुन को भी एक अच्छी दवाई की तरह इस्तेमाल कर सकते है- यदि बाहरी संक्रमण से बचना है तो लहसुन की 1-2 कलियों हर दिन सेवन करे.बाहरी संक्रमण से बचने के लिए सबसे अच्छी दवाई है |

हींग का सेवन करे-  हींग एक ऐसी दवाई है जो यदि खाली पेट ली जाये तो  यह पेट के लिए एक बहुत अच्छी दवाई है

गैस्ट्रोएन्टराइटिस (जठरांत्र शोथ) में  क्या क्या नही खाना चाहिए

यदि पेट में इन्फेक्शन हो जाये तो बहुत सी चीजो से दूर रहना पड़ता है तभी जल्दी ठीक होया जा सकता है |

नशीली चीजो से दूर रहे-  यदि पेट में इन्फेक्शन हो गया तो शराब जैसी नशीली चीजो से दूर रहना पड़ता है क्योकि यह सीधा लीवर पर असर करती है |

फाइबर युक्त चीजो से दूर रहे- पेट में इन्फेक्शन होने पर  फाइबर युक्त फलों और सब्ज़ियों का सेवन नही करना    करना चाहिए यह दस्त का कारण बन सकते है |

डेयरी उत्पाद का सेवन कम से कम करे- पेट के इन्फेक्शन में दूध, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों का सेवन न करें क्योकि इनको पचाने में बहुत ज्यादा समय लगता है|

मसालेदार भोजन का सेवन करे-  पेट के इन्फेक्शन होने पर ज्यादा मसाले की चीजे का  सेवन नही करना चाहिए ये पेट को खराब कर सकते है |

ज्यादा वसा वाली चीजो का सेवन न करे-चिकनाई वाला और वसायुक्त को पचाने में बहुत ज्यादा कठिनाई आती है    इसलिए ज्यादा फैटी मांस, वसायुक्त खाद्य पदार्थ  का सेवन न करे |

पेट के इंफेक्शन होने पर क्या क्या खाना चाहिए

यदि पेट का इन्फेक्शन हो जाये तो खाने पीने का बहुत ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है |

  • सादा भोजन का सेवन करना चाहिए जो आसानी पच जाये |
  • ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन करना चाहिए और ज्यादा निर्जलीकरण हुआ है  और भूख लागरी है तो सूप पीना चाहिए |
  • अपने पाचन तंत्र को अच्छा रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा  छाछ पीनी चाहिए |
  • गैस्ट्रोएन्टराइटिस में कच्चे केले खाएं तो सबसे अच्छे होते है |
  • ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए क्योकि पेट का इन्फेक्शन में दस्त से शरीर में पानी की कमी आ जाती है |

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