पेंसिल का आविष्कार किसने किया

पेंसिल का आविष्कार किसने किया

आज हम लिखने के लिए पेन का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन जब शुरू में लिखने की शुरुआत हुई थी तो पेंसिल का आविष्कार किया गया था और पेंसिल से ही लिखा जाता था लेकिन आज का समय कुछ अलग है. आज हम पेंसिल की बजाय पैन से ज्यादा लिखने के इच्छुक हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं .जब हमने पढ़ना शुरू किया था तो तब शुरू में हमें पेंसिल के साथ ही लिखना सिखाया जाता था क्योंकि पेन का लिखा हुआ मिटाया नहीं जा सकता था और अगर हम पेंसिल से लिखते हैं. तो उसको बाद में मिटाकर दोबारा भी लिखा जाता है. इससे हम अपनी गलती को ठीक कर सकते हैं. लेकिन पेन से अगर हमें लिखने में कोई गलती हुई तो वह गलती ठीक नहीं की जा सकती और पेंसिल हमारे लिए पैन के मुकाबले में चलाना भी आसान होती है. तो यह बात आपने भी कभी सोची होगी.

कि जिस पेंसिल हम इस्तेमाल करते हैं. यह कहां से आई और कैसे इसको जाता है. लेकिन हम आपको बता दें पेंसिल का इतिहास बहुत पुराना है. आज से बहुत समय पेंसिल का आविष्कार किया गया था लेकिन इसके अंदर समय के साथ-साथ बदलाव जरुर कर दिए गए थे और आज जो पेंसिल हमें प्राप्त होती है. वह बहुत समय पहले की ही बनाई गई पेंसिल का एक रूप माना जाता है. और हमारे जीवन में पेंसिल का बहुत महत्व होता है. क्योंकि किसी भी आदमी को पढ़ लिखकर बड़ा बनाने में पेंसिल का बहुत बड़ा योगदान रहता है. इस पोस्ट में पेंसिल के आविष्कार के बारे में बताएंगे. 

पेंसिल का आविष्कार किसने किया

पेंसिल शब्द को लेटिन भाषा के शब्द Penicillus से लिया गया है. Penicillus का मतलब पूंछ होता है. पहले के जमाने के में या बहुत समय पहले जानवरों के पूंछ के बाल के ब्रश बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे .लगभग 1564 में इंग्लैंड में एक बहुत बड़ा और भयानक तूफान आया था जिसके कारण वहां पर बहुत से पेड़ उखड़ गए और उसके में बहुत बड़ा पेड़ भी गिर गया था और वहां पर जब तूफान के बाद बकरियों के चरवाहे आए तो उस चरवाहे ने देखा कि इस पेड़ की जड़ों को बहुत सारा काला पदार्थ लगा हुआ है. सबसे पहले तो उसने उस  काले पदार्थ को कोयला सोचा था.

फिर उसने उस काले पदार्थ को जलाने की सोची तब उसने उसका काले पदार्थ को जलाया तो वह कोयले की भांति चल नहीं रहा था उस समय उसने उसे सिर्फ काले पदार्थ का नाम ही दिया था और बाद में उसका नाम ग्रेफाइट रखा गया और इस ग्रेफाइट को बकरियों के ऊपर निशान लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था और इंग्लैंड के बाजार में ग्रेफाइट को कागज में रखकर भेजा जाता था 16वीं शताब्दी के अंत में लोगों ने इस ग्रेफाइट से लिखना शुरु कर दिया.लेकिन ग्रेफाइट इतना ज्यादा नरम और नाजुक था कि इसे लिखने में बहुत ज्यादा परेशानी होती थी इसलिए फिर उस ग्रेफाइट को एक धागे के अंदर बांधकर लिखना शुरू कर दिया गया 1560 में सबसे पहले इटालियन लोगों ने पेंसिल बनाने के लिए  juniper नाम के एक पेड़ का इस्तेमाल किया गया उन्होंने इस पेड़ की लकड़ी को काटकर उसके टुकड़े के अंदर छेद करके ग्रेफाइट को इसके अंदर भर दिया और इसके अंदर ग्रेफाइट को चिपका दिया जाता था फिर लगभग 1660 में जर्मनी में लकड़ी के टुकड़ों को लेकर पेंसिल को बनाना शुरू किया गया था और वे लकड़ी के टुकड़ों को तराशकर और इनके बीच ग्रेफाइट को रखकर चिपका दिया जाता था.

और फिर इसके बाद 1790 इंग्लैंड और फ्रांस के बीच लड़ाई हुई और इस लड़ाई के बाद इंग्लैंड ने फ्रांस के लिए ग्रेफाइट को बंद कर दिया और इस ग्रेफाइट को बैन करने के बाद ग्रेफाइट की कमी होने लगी फ्रांस के मनिस्टर ने अपने कमांडर और साइंटिस्ट  निकोलस-जाक कोंटे  को इसका कोई सुझाव ढूंढने को कहा कुछ दिनों की खोज और छानबीन के बाद निकोलस ने 1 दिन पानी के अंदर चिकनी मिट्टी और ग्रेफाइट को मिलाया और उसका एक मिश्रण बनाया और उस मिश्रण को सूखने के लिए धूप के अंदर रख दिया अगर यह मिश्रण सूख जाता तो इसको फिर भठ्टी के अंदर जलाते इसी समय पर निकोलस ने एक और यह चीज देखी चिकनी मिट्टी को कम ज्यादा करने पर पेंसिल से लिखने में कुछ फर्क आ रहा है. और वहां से H और HB जैसे पेंसिल को बनाने की शुरुआत की गई और वहां से पेंसिल शुरू हुआ.

1795 में इस आविष्कार का पेटेंट निकोलस-जाक कोंटे को मिला और19वीं शताब्दी में पेंसिल के साथ रबड़ को भी लगाना शुरु कर दिया गया और उस रबड़ को पेंसिल के साथ लगाने के बाद उस पेंसिल से लिखी हुई चीज को मिटाना भी आसान हो गया इसके लिए दूसरी जगह पर जाने की जरूरत नहीं होती तो दोनों काम एक साथ करने के लिए पेंसिल के ऊपर रबड़ लगा दिया गया तो वहां से पेंसिल की शुरुआत हुई और इस समय में भी पेंसिल का इस्तेमाल होता आ रहा है.

1795 में पेंसिल के बनने शुरू हो जाने के बाद इसके अंदर बहुत से बदलाव किए गए हैं और आज के समय में हमारे सामने बहुत ही अलग अलग तरह की पेंसिल आती है. इनमें मुख्य रुप से हमारे सामने लगभग 6H,2B,HB जैसी पेंसिल हमें बाजार में मिलती हैं. क्या आप H और B का मतलब जानते हैं .कि पेंसिल में Hऔर B क्या होता है. शायद आप इसका मतलब नहीं जानते होंगे तो मैं आपको बता दूं कि इसमें H का मतलब Hard है. और B का मतलब Black होता है. इसलिए  पेंसिल को HB पेंसिल कहा जाता है.

इस पोस्ट में आपको पेंसिल के आविष्कार और इतिहास पेंसिल का आविष्कार किसने किया who invented pencil in hindi pencil ka aviskar kisne kiya pencil ki khoj kisne ki essay on pencil in hindi about pencil in hindi few lines on pencil in hindi autobiography of a pencil in hindi information about pencil in hindi pencil plural in hindi के बारे में बताया गया है .यदि आपको यह जानकारी पसंद आए तो शेयर करना ना भूलें और यदि आपका इसके बारे में कोई सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं.

3 Comments
  1. Satish says

    बहुत अच्छा लेख है बधाई…..

  2. Sujata beura says

    Very nice . Very usefull for all learners

  3. Sujata beura says

    Very usefull for all learners

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