पहला विश्व युद्ध कब हुआ और कैसे हुआ

पहला विश्व युद्ध कब हुआ और कैसे हुआ

हम आपको आज एक बहुत ही बढ़िया और रोचक जानकारी देंगे यह जानकारी शायद आपको बहुत ज्यादा पसंद आए क्योंकि यह जानकारी है ही ऐसी जी हां हम आपको आज इस पोस्ट में प्रथम विश्वयुद्ध के बारे में जानकारी देंगे प्रथम विश्व युद्ध क्यों हुआ था क्या कारण थे और प्रथम विश्वयुद्ध के अंदर कितने लोग मरे थे इस तरह की कुछ और भी रोचक जानकारी आपको देंगे यह जानकारी आपके लिए बहुत ही आवश्यक है क्योंकि इसमें बहुत सी ऐसी जानकारी है जो आपके लिए काम की हो सकती है.

बहुत से लोगों को पता नहीं है कि प्रथम विश्व युद्ध होने के क्या कारण थे प्रथम विश्वयुद्ध कब हुआ था और प्रथम विश्व युद्ध के अंदर कौन-कौन से देश ज्यादा आये तो हम आपको प्रथम विश्वयुद्ध , प्रथम विश्व युद्ध के कारण एवं परिणाम , प्रथम विश्व युद्ध का तत्कालीन कारण , प्रथम विश्व युद्ध video, प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव, प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण, युद्ध के परिणाम, के बारे में हम आपको पूरी जानकारी विस्तार से बताएंगे.

पहला विश्व युद्ध कब हुआ

प्रथम विश्वयुद्ध के अंदर लगभग विश्व के सभी देश शामिल थे करोड़ों की संख्या में लोगों को की जान गई थी और अरबों खरबों रुपए का नुकसान हुआ था क्योंकि यह पहला विश्व युद्ध था इससे पहले इतना बड़ा युद्ध कभी नहीं हुआ था पहले विश्वयुद्ध के समय यह भी नहीं पता चल पाया था कि शायद दूसरा विश्वयुद्ध कभी होगा या नहीं होगा

लेकिन जब पहला विश्व युद्ध हुआ तो पता भी नहीं था कि दूसरा विश्व युद्ध होगा लेकिन जब दूसरा विश्व युद्ध हुआ तो पहले विश्व युद्ध का नाम द फर्स्ट वर्ल्ड वॉर रख दिया गया और पहला विश्व युद्ध 28 जुलाई 1914 में शुरू हुआ और 11 नवंबर 1918 में समाप्त हुआ और इसके अंदर लगभग 1 करोड़ 70 लाख से भी ज्यादा आदमी मारे गए दो करोड़ से भी ज्यादा लोग घायल हुए और बहुत ज्यादा नुकसान हुआ

लेकिन सबसे बड़ी बात यही उठती है कि आखिर पहला विश्व युद्ध होने के क्या कारण थे क्यों हुआ पहला विश्व युद्ध तो हम आपको बता दें कि पहले विश्व युद्ध होने के इसके पीछे वैसे तो बहुत से कारण थे हम आपको इसके अंदर सभी कारण बताएंगे कि पहला विश्व युद्ध क्यों हुआ.

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पहला विश्व युद्ध क्यों हुआ

कोई भी भयानक हादसा हो उससे पहले कुछ ना कुछ घटनाएं जरूर होती है तो ऐसा ही पहले विश्व युद्ध से पहले हुआ था पहले भी विश्व युद्ध के होने से पहले ही कुछ घटनाएं हुई थी सबसे पहले शुरुआत ऑस्ट्रिया और हंगरी से हुई क्योंकि 1868 में यह दोनों देश एक ही राष्ट्र बन चुके थे और इस महान राज्य के सम्राट फ्रांसिस जोसफ थे अर्क्डुक फ्रैन्ज़ फ़र्डिनैँङ इस राज्य के राजकुमार थे 28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया और हंगरी राज्य के सम्राट फ्रांसिस जोसेफ और फ्रैन्ज़ फ़र्डिनैँङ उनकी उमर उस समय 50 साल थी. और यह दोनों अब अपने राज्य के एक शहर में जाने के लिए घर से निकले. लेकिन उनके राज्य की कुछ गुप्त चरो ने उन्हें वह ना जाने की सलाह दी थी क्योंकि जब उनके सम्राट फ्रांसिस जोसेफ ने 1908 में बोस्निया नाम की एक देश को जीत लिया था वह पूरा का पूरा देश अब किसी और देश का गुलाम हो चुका था और उन लोगों का स्वतंत्र अस्तित्व अब मिट चुका था इस बात से बहुत लोग नाखुश थे और

उनके अंदर क्रांति की भावना पैदा हो चुकी थी और वहां के बहुत से लोग क्रांतिकारी थे फिर इन क्रांतिकारियों ने अपना एक संगठन बनाया जिसका नाम था ब्लैक हैंड लेकिन क्रांतिकारी फ्रांसिस के सामने तो लड़ाई नहीं लड़ सकते थे क्योंकि फ्रांसेस की सत्ता को नहीं ललकार सकते थे लेकिन यह क्रांतिकारी कुछ तलाश में जरूर थे और जब राजकुमार शहर की ओर जा रहे थे तब उनकी यह तलाश जारी थी तो जब वह राजकुमार शहर की ओर जा रहे थे तो उन क्रांतिकारियों से उनकी जान को खतरा था लेकिन उससे पहले राजकुमार के कुछ गुप्त चरो ने उन्हें यह जानकारी दी थी कि आपको वहां नहीं जाना चाहिए लेकिन नहीं माने और वह शहर की ओर रवाना हो गई क्योंकि पहले भी राजकुमार को तीन बार मारने की नाकाम कोशिश हो चुकी थी क्योंकि अगर राजकुमार शहर की ओर नहीं जाते तो शायद आज के जैसी दुनिया नहीं होती क्योंकि पहले विश्व युद्ध के कारण दुनिया के पूरे भौगोलिक ,सामाजिक ,राजकीय ,और आर्थिक हर तरह के पहलू को बदल कर रख दिया है.

पहले विश्वयुद्ध में और उसके बाद भी कई ऐसी घटनाएं घटी जिसने आज की दुनिया को जन्म दिया लगभग 100 साल पहले हुआ विश्व युद्ध पूरी दुनिया को बदलने वाला आधार बना 28 जून 1914 को राजकुमार और सम्राट और उनकी पत्नी शहर की ओर रवाना हुए और फिर सम्राट और उनकी पत्नी और राजकुमार टाउन हॉल की ओर आगे बढ़े जब भी वह आगे बढ़े तो उनके साथ 6 गाड़ियां थी और आगे एक मोड़ था रोड के ऊपर और इनको देखने के लिए बहुत सारे लोग इकट्ठा हुए थे और बहुत भीड़ थी और इस भीड़ के अंदर बहुत से क्रांतिकारी थे जो कि इन दोनों को मारने के लिए आए थे और भीड़ के अंदर से एक क्रांतिकारी ने अपनी जेब से बम निकाला और इन दोनों की गाड़ी के ऊपर फेंक दिया लेकिन एक बार फिर से यह दोनों बच गए और बम गाड़ी के बोनट से लगकर पीछे गिर गया और फिर वह बम फेंकने वाला क्रांतिकारी गोली खाने के बाद मरने वाला था लेकिन वह मर नहीं पाया बच गया फिर सम्राट के सेना ने उसको पकड़ कर ले आए और गिरफ्तार कर लिया.

लेकिन एक बार फिर से दोबारा जब राजकुमार फ़र्डिनैँङ और उनकी पत्नी वापस आ रहे थे. तब भी उतनी ही भीड़ लगी हुई थी फिर से उसी भीड़ में बहुत से क्रांतिकारी शामिल थे लेकिन अब की बार एक क्रांतिकारी निकला उस भीड़ के अंदर से और उसने अपनी पिस्तौल से राजकुमार का फ़र्डिनैँङ और उनकी पत्नी पर गोली चला दी उनकी पत्नी को गोली लगी और राजकुमार फ़र्डिनैँङ आप को भी गोली लगी फिर उन दोनों की मृत्यु हो गई और इस मृत्यु के बाद और इन दोनों की हत्या होने के कारण पूरे यूरोप में आग फैल गई और फिर वहीं से विश्वयुद्ध की जंग छिड़ी लेकिन उन दोनों की मृत्यु का कारण ऐसा नहीं था कि 1 विश्व युद्ध हो जाएगा किसी ने ऐसा सोचा भी नहीं था लेकिन दुनिया में पिछले 100 सालों में आए बदलाव का कारण इन दोनों की मृत्यु हुई बनी लेकिन और राजकुमार की मृत्यु के ठीक 25 दिन बाद ऑस्ट्रिया हंगरी ने सर्बिया को 10 बातों को का अल्टीमेटम भेजा लेकिन सर्बिया ने उनमें से सिर्फ 8 बातों को माना और दो को मानने से मना कर दिया

लेकिन इन 2 बातों को न मानने के कारण ऑस्ट्रेलिया और हंगरी ने सरिया के ऊपर युद्ध की घोषणा कर दी 28 जुलाई 1914 को ऑस्ट्रिया और हंगरी ने सर्बिया की उत्तर पश्चिम सीमा पर लॉन्ग रेंज टैंकों से गोले बरसाने शुरू कर दिए और यहां से प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत हुई और उसमें कोई जानता भी नहीं था यह टैंक से निकलने वाले गोले दुनिया के लगभग 28 देशों को अपने अंदर ले लेगा और दुनिया में पहला ऐसे कभी भी नहीं हुआ वह युद्ध शुरू होने वाला था और दुनिया के लगभग 1.70 लाख लोग इस युद्ध में अपनी जान की बलि देने वाले थे और इस घटना से सौ साल पहले लगभग सारे यूरोप में बिल्कुल शांति थी उसका सारा समय बहुत ही शांति से बीते 100 सालों के अंदर यूरोप में कोई भी बड़ा युद्ध नहीं हुआ था ऑस्ट्रिया और हंगरी और सर्बिया के इस पहले युद्ध का असर पूरे यूरोप में होगा यह पूरी दुनिया में होगा यह किसी ने सोचा भी नहीं था ना ही ऐसा कोई कारण था कि यह पूरी दुनिया के अंदर फैल जाएगा और राजकुमार कार्डिनल की हत्या से पूरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो चुकी थी और इनके तीन प्रमुख कारण थे

पहले विश्व युद्ध के प्रमुख कारण

1. कारण

पहले विश्व युद्ध के तीन प्रमुख कारण थे प्रिंस बिस्मार्क ने 39 छोटे-छोटे जर्मन वासियों के राज्यों को मिलाकर 1871 में जर्मनी नाम के एक बड़े राज्य का गठन किया एकीकरण के नाम पर जर्मनी नाम का यह राज्य बहुत ही शक्तिशाली और पावरफुल था और इन 39 राज्यों में से एक प्रशिया नाम के राज्य का एक विलियम केसर जर्मनी राष्ट्र का सम्राट बना था इसके कारण पूरे यूरोप के अंदर डर का कारण फैल गया था इटावा इटली किंग इटली का सर्जन 18 से 61 में भाषावाद के नाम पर हुआ इसलिए इटली के नाम की एक बड़ी सत्ता का नाम भी का सर्जन यूरोप में हुआ था और सभी राजनीतिक तरीके बदल चुके थे इन बदलते हुए राजनीतिक तरीकों ने पूरे यूरोप के अंदर चिन्ह फैलाया था जो कि भाषा और जातिवाद के ऊपर था.

उदाहरण के लिए जैसे रूस की सत्ता स्वायत्त जाति की थी और वैसे ही ऑस्ट्रेया और हंगरी में भी बहुत से स्वायत्त जाति के लोग फंसे हुए थे जो स्वतंत्रता की आंदोलन चला रहे थे सबसे बलवान देश रूस इन स्वतंत्र कारी और आंदोलनकारियों का समर्थन था रूस यूरोप में ऑस्ट्रिया और हंगरी के सामने एक बड़े स्वायत राष्ट्र को खड़ा करना चाहता था. जिसके कारण वह सर्बिया को खुला समर्थन दे रहा था इस तरफ हिटलर सहित सभी और ऑस्ट्रियन वासी और जर्मन वासी जर्मनी जाति के थे इसलिए जर्मनी का झुझाव ऑस्ट्रेलिया और हंगरी के तरफ से रूस मन शत्रु देश था और यूरोप को पूरे को देखा जाए तो यूरोप दो भागों में बटा हुआ था

2. कारण

ऑस्ट्रिया हंगरी और सर्बिया का निजी विग्रह पूरी दुनिया को युद्ध के अंदर खींच लाया उसका दूसरा कारण था नए खोजे गए टेक्निकल हथियार मशीन गन इत्यादि और उन खोजो से खोजकर्ता देशों को मिला आत्मबल और वे इन हथियारों वाले देश किसी भी शत्रु देश को बस थोड़ी ही देर में युद्ध के अंदर हरा सकते थे और उसके ऊपर कब्जा कर सकते थे एक और भी इसके अलावा ससस्त्र था फ्लाइट प्लन जो 1930 में खोजे गए राइट्स ब्रदर्स की अहिंसक की हिंसक कॉपी था जर्मनी के बाद ब्रिटेन और फ्रांस भी अपने देश के लिए ऐसे फाइटर विमान बना चुके थे इन तीनो देशो को अपनी नई खोज हुई टेक्नोलॉजी पर बहुत गर्व था और महासागरों पर जर्मनी हमेशा के लिए ब्रिटेन को मिटा देना चाहता था और सबसे ज्यादा लड़ाई को बल देने वाला था एक और आविष्कार मशीन गन इससे पहले 1- 1 ट्रिगर दबाने से एक-एक गोली निकलने वाली गन का इस्तेमाल किया जाता था.

लेकिन 1883 में ईरान मैगजीन नाम के एक अमेरिकन ने पहली मशीन गन बनाई तब से लेकर 1914 तक इसके अंदर काफी सुधार किए गए और मशीन गन की एकदम बढ़िया और नई टेक्नोलॉजी उभर कर सामने आई ब्रिटेन और जर्मनी में भी उस समय 1 मिनट में 600 से ज्यादा गोली दागने वाली 900 मीटर की रेंज वाली कई मशीन गन थी. रेक्टिफायर सशस्त्र ने उन देशों की हिम्मत बढ़ा दी थी और यदि कहीं पर भी दिक्कत आई तो बिना कुछ सोचे समझे युद्ध में खुद पढ़ने का मन में साहस पैदा हो गया.

3. कारण

ऑस्ट्रेलिया हंगरी और सर्बिया के स्थाई युद्ध को विश्व युद्ध को स्वरूप देने वाले राष्ट्रवाद और नई टेक्नोलॉजी के युद्ध शास्त्र तो थे लेकिन उनके अंदर एक और भी कारण था 3 कारण था यूरोप के देशों की आपसे सहमति यूरोप के प्रत्येक देश में युद्ध के लिए आपस में आपसी लश्करे सहमती हुई थी और यदि कभी युद्ध की नौबत आए तो उसके साथी मित्र देश को उसके साथी मित्र देश की सहायता करनी चाहिए और उसके बचाव के लिए खुद भी युद्ध में जाना था ऊपर से इनमें कई करार द्विपक्षीय थे.

इन करार द्विपक्षीय समझौतों ने यूरोप के सभी देशों को युद्ध करने के लिए और सास दिया जैसे कि अगर मान लो किसी बड़े देश के सामने मतभेद होने से छोटे देश उसे युद्ध नहीं करेगा लेकिन लेकिन कई और बड़े मित्र देशों के साथ हुए करार के कारण छोटे देशों को अपनी हिम्मत से जोखिम लेने का ज्यादा आत्मबल मिलेगा. इन शोर्ट संघर्ष की आग पूरे विश्व में पहले वाली थी और प्रत्येक देश अपने किए हुए करार के कारण युद्ध कूदने वाला था इसमें सबसे पहले पहल करने वाला देश रूस था जिसने रशियन सवाय्त वाले सर्बिया को लश्कर ए सहायता करने का लिखित वचन दिया था हुआ कुछ ऐसा कि रूस की आंतरिक स्थिति उससे हमें बहुत ही खराब थी

चार्ल्स निकोलस के सामने आंदोलन कर रहे थे यह क्रांतिकारी आंदोलन कर रहे थे यह क्रांतिकारी देश राज्शायी और साम्यवादी सामंतशाही साम्यवाद लाना चाहते थे खेत मजदूर कामगार सब इनमें शामिल पर हिंसा बेकाबू होती जा रही थी निकोलस ने इन क्रांतिकारियों के नेता को जेल से निकाल देने के बावजूद सत्ता उनके हाथों से सरकते हुई नजर आ रही थी इसलिए निकोलस को लगा कि ऑस्ट्रेलिया हंगरी के सामने के युद्ध में को सर्बिया की मदद करने के लिए अगर रूस के सैनिक भेजे जाए तो रशियन देशवासियों का मन इन रोज-रोज होने वाले युद्ध में लगा रहेगा और रसिया के आंगन में होने वाले इन युद्ध का अंत हो जाएगा

इसलिए उसने 23 जुलाई 1914 को सर्बिया की मदद के लिए रशियन लश्कर भेज दिया रूस के इस कदम ने जर्मनी के सम्राट के विलियम्स को परेशानी में डाल दिया. क्योंकि युद्ध की स्थिति में करार के अनुसार जर्मनी को ऑस्ट्रिया हंगरी का साथ देना था और उसने उसके लिए उसको रसिया जैसे देश के साथ लड़ना होगा ऐसी कभी कल्पना नहीं की थी दूसरे ही दिन जर्मनी ने रसिया को अपनी फौजी कार्यवाही को 24 घंटे में समेट लेने का अल्टीमेटम दिया रसिया ने जर्मनी की इस बात को ठुकरा दिया इसलिए जर्मनी ने रसिया के साथ युद्ध की घोषणा कर दी फ्रांस में जर्मनी की कोई परवाह ना करते हुए कोई जवाब नहीं दिया इसलिए रसिया के बाद फ्रांस की बारी थी फिर भी यह युद्ध विश्व युद्ध में बदल जाए यह भी कल्पना नहीं की थी ना ही इसके कोई सबूत दिखाई दे रहे थे क्योंकि विश्व के बहुत बड़े देश अभी इस स्थिति से दूर थे.

इनके अंदर ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश शामिल थे वैसे यूरोप में चाहे कुछ भी हो अमेरिका को इससे कुछ लेना देना नहीं था यूरोप के साथ अमेरिका का कोई संबंध था तो बस वह सिर्फ इतना ही था कि अमेरिका में बसे लोगों के दादा परदादा सदियों पहले यूरोप से अमेरिका आकर बसे थे बाकी खुद की ही राजकीय सामाजिक और आर्थिक नीतियों से मतलब रखने वाला अमेरिका कुछ देना नहीं था. बीसवी सदी की शुरुआत में दुनिया की सर्वोच्च महासत्ता ब्रिटेन था ऑस्ट्रेलिया हंगरी के राजकुमार की हत्या हुई उसका और उससे ब्रिटेन का दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं था इसलिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने ठंडा कलेजा लिए हुए बैठे रहे उन्होंने कुछ भी नहीं किया और ब्रिटेन लादे भी तो किसके साथ लड़े वह जर्मनी उसका दुश्मन नहीं था और उनके से मैत्री करार थे जर्मनी के सम्राट विलियम कैचर आपस में रिश्तेदार थे,

अगर लड़ाई के सारे मोर्चे खोल भी जाए तो भी ब्रिटेन कुछ नहीं करेगा वह ठंडा बैठा रहेगा उसने यह ठान ली थी इसलिए जब जर्मनी ने फ्रांस को अपनी तटस्थता जाहिर करने का अल्टीमेटम भेजा उसके दूसरे दिन तो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हैं छुट्टी पर जाने वाले थे लेकिन अचानक ब्रिटेन में बसे फ्रांस राजदूत ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के साथ है अर्जेंट मीटिंग का न्योता भेजा इसलिए प्रधानमंत्री को लंदन में ही रहना पड़ा दूसरे दिन दोनों मिले फ्रांस के राजदूत ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के आगे प्रस्ताव रखा कि हमारी सरकार यह चाहती है जर्मनी फ्रांस पर कभी हमला करे तो आप हमारा सहयोग करें और ब्रिटिश फौज फ्रांस के सहयोग के लिए भेजिए इस विषय पर हम आपकी राय जानना चाहते हैं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने साफ मना कर दिया की. में अपनी सेना फ्रांस में नहीं भेज सकता

यूरोप खंड में अगर युद्ध हो तो मैं उसमें ब्रिटेन को धकेला नहीं चाहता हूं और उन्होंने कहा यदि हम आपको अब हां कर दे तो हमारी सरकार शाम तक ही गिर जाएगी वैसे भी कभी फ्रांस के जर्मनी के साथ मतभेद नहीं हुए हैं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने सही कहा था जर्मनी और फ्रांस के बीच ऐसा अभी तक कोई मतभेद नहीं हुआ था जिससे कि युद्ध हो लेकिन स्थिति उसके दूसरे दिन घम्भीर पड़ने वाली थी 2 अगस्त 1914 को जर्मनी ने फ्रांस को सूचना दे दी कि आप हमें यह बताओ कि आप किसके साथ हैं फ्रांस ने जवाब दिया कि अगर युद्ध हुआ तो उस स्थिति में फ्रांस अपना निर्णय खुद करेगा जर्मनी कोई फ्रांस का यह जवाब अस्पष्ट लगा जर्मनी को लगा की शायद युद्ध लड़ने के लिए अयोग्य समय की प्रतीक्षा कर रहा है लेकिन फ्रांस के मन में ऐसा कोई इरादा ही नहीं था जर्मनी के समराट कैसर ने सोचा अगर फ्रांस भी हमारे साथ युद्ध करें तो उस स्थिति में पूर्व में रसिया के साथ और इधर पश्चिम में फ्रांस के साथ दोनों तरफ युद्ध करना उसके तरफ बहुत ही मुश्किल था.

इस प्रकार शंका के आधार पर सम्राट कैसर ने पहले फ्रांस का काम तमाम करने की सोची जो बिल्कुल भी जरूरी नहीं था इधर फ्रांस ने जर्मनी और फ्रांस की बॉर्डर पर 10,000,00 सैनिक तैनात किए थे जर्मनी को यह पता था कि अगर आमने-सामने के बॉर्डर पर लड़ाई करेगा दोनों तरफ से नुकसान ज्यादा होगा इसलिए जर्मनी को एक बीच का रास्ता बनाकर युद्ध करना चाहता था तो जर्मनी ने सोचा वह अगर बेल्जियम के अंदर से अपनी सेना फ्रांस में भेजें तो वह सोचेगा कि जर्मनी ने बॉर्डर पर सेना तैनात की है इधर जर्मन सेना बेल्जियम के अंदर से उनके घर में घुसकर हमला कर देंगे इसलिए दूसरे ही दिन जर्मनी के कैसर सम्राट के बेल्जियम के राजा अल्बर्ट को संदेश भेजा कि आप हमें अपने देश में घुसने दें हमारे 40,000,00 सैनिक आपके देश के अंदर से फ्रांस में जाएंगे और आपके देश के अंदर किसी भी तरह का कोई भी नुकसान नहीं होगा लेकिन बेल्जियम के राजा अल्बर्ट ने मंजूरी नहीं दी उसने सोचा कि जर्मनी के पास 45,000,00 सैन्य है और उसमें वह जर्मनी चाहता है कि 40,000,00 सैन्य फ्रांस में भेजें और उसने की हमारे पास सिर्फ एक लाख सैन्य है इस परिस्थिति में अगर जर्मनी चाहे तो बेल्जियम पर कब्जा भी कर सकता था.

और इस डर के कारण बेल्जियम के राजा ने मंजूरी देने से मना कर दिया और तुरंत ही 3 अगस्त 1914 के दिन ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम से सहायता मांगी ब्रिटेन के पास से सहायता मांगी उन्होंने सहायता इसलिए मांगी क्योंकि सन 1739 में ब्रिटेन की और बेल्जियम की सैन्य समझौते हुऐ थी कि कभी ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो बेल्जियम को किसी देश से खतरा हो तो ब्रिटेन उसकी सहायता करेगा लेकिन अगर डेढ़ साल पुरानी इस चुनौती को आउटडेटेड बताकर ब्रिटेन ने उसकी सहायता नहीं की होती तो शायद पहला विश्वयुद्ध नहीं होता क्योंकि यदि बेल्जियम के आर पार होकर जर्मन सैनिक फ्रांस में घुस भी जाते तो उसके 45,000,00 सैन्य को फ्रांस पहुंच सके उतनी क्षमता समिति लेकिन के ब्रिटेन प्रधानमंत्री और उल्टा सोचा उन्होंने यह सोचा की विजय पर विजय होता हुआ जर्मन सैन्य अगर फ्रांस को भी जीतकर इंग्लिश समुद्र को पार करके ब्रिटेन तक पहुंच जाए तो उनका देश भी खतरे में आ जाएगा और निष्क्रिय होने के कारण शायद उन्हें अपनी सरकार से भी हाथ धोना पड़े लेकिन उनकी यह धारणा गलत थी बेल्जियम के विरोध के बावजूद 4 अगस्त 1914 जर्मन सैन्य बेल्जियम में घुसा उसी समय जर्मनी ने बेल्जियम के साथ भी युद्ध की घोषणा कर दी इस घोषणा के बहुत ही दुष्परिणाम होने वाले थे क्योंकि ब्रिटेन की इस घोषणा के बाद जहां जहां पर ब्रिटिश राज्य था. वह देश जैसे कि भारत श्रीलंका न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका कनाडा जैसी देशों की सेना भी ब्रिटिश राज के लिए युद्ध लड़ेगी जिसके अंदर सबसे बड़ा सैन्य बल भारत का था ब्रिटिश राज्य के लिए युद्ध लड़ने कीभारत के महाकाय सेना की कुछ टुकड़ियां लगभग 8 लाख 50,000 सैनिक युद्ध लड़ने के लिए जहाज में ब्रिटेन भेजे गए .

इधर ईरान इराक तुर्की इजिप्ट इन सभी देशों में उस समय बड़ी गाड़ियां मोटर गाड़ी यह सब नहीं थे. इसलिए भारत में कुछ ऊंट ले जाए गए इस युद्ध के अंदर लगभग 80,000 भारतीय सैनिक मरने वाले थे 60,000 से भी ज्यादा सैनिक घायल होने वाले थे 30,000 घोड़े 65,000 खच्चर 11000 ऊंट और 5000 बैलों की भी बलि चढ़ने वाली थी लेकिन दुख इस बात का था यह सब बलिदान भारत के लिए नहीं बल्कि ब्रिटेन के लिए था इधर यूरोप में जब 4 अगस्त के दिन युद्ध की घोषणा की तो एक के बाद एक सारे देश युद्ध में कूद पड़े 6 अगस्त के दिन ऑस्ट्रिया हंगरी ने रसिया के सामने अगस्त 8 के दिन सर्बिया के मित्र देश मोटे होने मॉन्टेंगरो ने ऑस्ट्रेलिया हंगरी के सामने. 9 अगस्त के दिन फ्रांस ने भी ऑस्ट्रिया हंगरी के सामने 12 अगस्त के दिन ब्रिटिश ने ऑस्ट्रिया हंगरी के सामने मोंटेनेग्रो ने जर्मनी की सरगम ने 23 अगस्त के दिन जापान ने भी जर्मनी के सामने 25 अगस्त को ऑस्ट्रिया हंगरी ने जापान के सामने युद्ध की घोषणा कर दी वेसे देखा जाए तो 1 महीने से भी कम के समय में 9 देशों ने एक दूसरे के सामने युद्ध की घोषणा कर दी और यदि ब्रिटिश राज्य के भारत कनाडा ऑस्ट्रेलिया श्रीलंका जैसे देश गिने जाए तो कुल 28 देश इस युद्ध में कूद पड़े इनमें से सबसे समझदार देश अमेरिका था अमेरिका ने यूरोप में होने वाले युद्धों के अंदर कुछ भी लेना देना नहीं था लेकिन कुछ ऐसे विचित्र कारण बने जिनके कारण अमेरिका भी की भी युद्ध में शामिल हुआ

हुआ यूं कि ब्रिटेन की युद्ध की घोषणा करने के बाद जर्मनी के समराट कैसर है यह चाहते थे कि महासागरों पर ब्रिटेन की सबमरीन खत्म हो जाए इसलिए सम्राट कैसर ने अपने देश की समरीन को अटलांटिक ओशन में काम लगा दिया जर्मनी की सबमरीन ब्रिटेन के मालवाहक जहाज खाने पीने और खाद्य सामग्री लाने ले जाने वाले जहाजों तथा युद्ध जहाज को निशाना बनाना शुरु कर दिया. इतना ही नहीं जर्मन सबमरीन ने ब्रिटेन के यात्री जहाज को भी नहीं छोड़ा इस घटना के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के प्रमुख से सहायता मांगी लेकिन उनके प्रेसिडेंट ने मना कर दिया क्योंकि वह अमेरिका को यूरोप में होने वाले इस युद्ध में शामिल करना नहीं चाहते थे और वह उनके देश के हित में भी नहीं था लेकिन अमेरिका को दिक्कत पहुंचाने वाली कुछ घटनाएं 7 मई 1915 के दिन घटी जर्मन समरीन ने ब्रिटेन के एक यात्री जहाज को नष्ट कर दिया जिनके अंदर मौजूद 1198 लोग मारे गए जिनके अंदर 128 अमेरिकी नागरिक थे अमेरिका को युद्ध में कूद पढ़ने का यह एक कारण था लेकिन जर्मन सम्राट के कैसर ने अमेरिका से माफी मांगी और वो बोले आगे से अंधाधुंध छापेमारी करके जहाजों को आगे टारगेट नहीं बनाया जाएगा यह वादा किया इसलिए अमेरिका ने कोई भी वापसी नहीं की और उस बात का अंत आ गया यहां पर जर्मनी ने अमेरिका को दी गए वादे जो अंधाधुंध जहाजों पर छापेमारी नहीं होगी इसका यह मतलब नहीं इसका यह मतलब होता था कि जर्मनी पहले चेक करेगा कि उनके अंदर अमेरिकी नागरिक तो नहीं है और उसके बाद हमला करेगा इधर जर्मनी की नीति के कारण जर्मनी को मार पड़ी क्योंकि जर्मनी जहाजों में पुष्टि करने की कोशिश करता था कि जहाज के अंदर अमेरिकी नागरिक है या नहीं उससे पहले तो ब्रिटिश सैनिकों पर हमला कर देते थे.

और इसके कारण और इसके कारण जर्मनी की कई सारे सबमरीन डूबा देगी और जर्मनी को अपने कई सारे युद्ध जहाज और सबमरीन का नुकसान हुआ इधर इन नीति के कारण जर्मनी को बहुत ही नुकसान भुगतना पड़ रहा था ब्रिटेन के समुंदर में नाकाबंदी करने वाला जर्मनी का प्लान रद्द होता हुआ दिखाई दे रहा था समुंद्री युद्ध को जीतने के लिए जर्मनी की नेवी को खुली छूट देने की जरूरत थी लेकिन अगर जब जर्मनी खुली छूट दे और जर्मन सबमरीन अंधाधुंध फायरिंग करें तो उसके अंदर अमेरिकी जहाजों को या अमेरिकी नागरिकों को मारे जाने की संभावना तो थी ही और यदि इसमें भी अमेरिकी नागरिक मारे गए तो अमेरिका शांत रहने वाला नहीं था अमेरिका उसके बाद जर्मनी को सबक सिखाने के लिए अपना शक्तिशाली सैन्य यूरोप में उतारे वह बिल्कुल ही संभव बात थी फिर जर्मनी के सम्राट ने इस स्थिति से निपटने के लिए उपाय ढूंढ निकाला उसका उपाय यह था कि अमेरिका को उसकी घरेलू लड़ाई में ही उलझा दिया जाए इसके लिए जर्मनी ने मेक्सिको को उकसाया दरअसल कैलिफ़ोर्निया, नोएडा, न्यू मेक्सिको संपूर्ण प्रदेश असल में मेक्सिको के थे जिसको 1848 के अंदर अमेरिका ने अपने कब्जे में ले लिए था.

इन राज्यों को वापस मेक्सिको को दिलाने के लिए जर्मनी ने कोड वर्ल्ड मेक्सिको को संदेश भेजा इसमें मेक्सिको को सिर्फ करना इतना ही था सिर्फ अमेरिका के सामने युद्ध की घोषणा कर देनी थी और उसके बाद जर्मन सैनिक उसकी सहायता के लिए वहां पहुंच जाते जर्मन सरकार ने भेजा यह संकेत सांकेतिक भाषा और गुप्त था लेकिन इस संदेश को ब्रिटिश गुप्त चरो डीकोड कर दिया और अमेरिका के प्रमुख को दे दिया 6 अप्रैल 1917 के दिन अमेरिका भी पहले विश्वयुद्ध के अंदर शामिल हो गया उसके साथी क्यूबा .थाईलैंड जाना चीन .ग्रीस. ब्राजील जैसे देश भी युद्ध के अंदर कूद पड़े इटली और उसके पांच देश पहले ही युद्ध के अंदर शामिल हो गए थे देखा जाए तो ऑस्ट्रिया और हंगरी और जर्मनी का युद्ध विग्रह अब बहुत बड़े विश्वयुद्ध के रूप में परिवर्तित हो चुका था यह युद्ध 4 वर्ष और 4 महीने और 11 दिन तक चला जिसमें करोड़ों लोग मारे गए लाखों बेघर हुए अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ इस सब में बस हैरान करने वाली बात यही थी कि ऑस्ट्रिया और हंगरी के राजकुमार को मारे गए बुलेट की गोली के कारण इतना बड़ा विश्व युद्ध हुआ और इस छोटी सी पिस्तौल की गोली इतने बड़े विश्वयुद्ध को जन्म दिया और पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया.

प्रथम विश्व युद्ध के बाद बदलाव

उसको अन्दर असर आने का शुरू हो गये थे. और उनमें से एक असर यह है कि रशिया में 370 साल पुरानी जारशाही का अंत हो गया और वहां पर साम्यवाद शुरू हुआ कुछ समय बाद साम्यवादी देश रसिया अमेरिका के बीच गोल्ड वोर शुरू होने वाला था और इन दोनों देशों लगभग 30,000 परमाणु बम बना देने वाले थे इस युद्ध के बाद जर्मनी के साथ कई अन्याय हुए जिसने भी दूसरे विश्वयुद्ध को जन्म दिया ब्रिटेन का सूरज लगभग अस्त होने वाला था और पश्चिम में एक अमेरिका नाम की महाशक्ति सत्ता बनने वाली थी दरअसल यूरोप में हुए युद्ध के कारण यूरोप में कई उद्योग खत्म हो चुके थे लगभग सारी कंपनियां और मिल बंद हो चुके थे यूरोप के अंदर खुद से कुछ चीज को पैदा करने की क्षमता नहीं थी इस तरह ब्रिटेन की मांगों को पूरा करने के लिए अमेरिका मै उद्योग शुरू हुए और अमेरिका देश को कुछ ही सालों में पैसे वाला देश बना दिया और इस विश्व युद्ध में भी कई देशों की भूगोल बदल कर रख दिया ऑस्ट्रिया और हंगरी नाम के दो देशों की अलग-अलग स्थापना हुई मोंटेनेग्रो का कोई अस्तित्व नहीं रहा और बहुत से छोटे-छोटे और देशों का जन्म हुआ और इस विश्व युद्ध के कारण रोमानिया का भौगोलिक युग लगभग दुगना हो चुका था विश्व युद्ध के बाद युद्ध में जर्मनी बहुत ही बुरी तरह से पराजित हुआ.

इसलिए केसर को अपने देश का लगभग बहुत बड़ा हिस्सा अपने आस पास के देशों को दे देना पड़ा. जर्मनी की रेलवे इंजन टेक्नोलॉजी और सबमरींस फ्रांस और ब्रिटेन ने युद्ध में हुए नुकसान के नाम पर छीन ली और ऊपर से 50 अरब डॉलर की पेनल्टी भी लगाई यह जर्मनी के लिए बिल्कुल सहने वाली बात नहीं थी जर्मनी की सत्ता के लिए यह बहुत ही असंतोषजनक बात थी क्योंकि उनका देश और उनकी सरकार घुटनों पर थे प्रथम विश्वयुद्ध में हुई कुछ आकस्मिक घटनाओं ने आने वाले समय को बदल दिया घटना ऐसी थी कि एक ब्रिटिश सैनिक फ्रांस की उत्तर सीमा में जर्मनी के साथ युद्ध लड़ रहा था लुइस टाइप की राइफल के साथ वह और उनके साथी जर्मनी के साथ कई घंटों तक युद्ध लड़ते रहे और उन्होंने जर्मन सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया एक इन सबके बीच अचानक और एक जर्मन सैनिक राइफल के सामने आकर खड़ा हो गया वह जर्मन सैनिक घायल था और उसने हेनरी रूटरडल के सामने राइफल तान रखी थी औरहेनरी रूटरडल उसको सूट करने की सोच बदल दी और उसने अपनी राइफल को नीचे झुका दिया और वह सैनिक वहां से दूर चला गया कई साल बाद है हेनरी रूटरडल को बहुत पछतावा हुआ क्योंकि जो सैनिक हेनरी रूटरडल छोड़ा था वह हिटलर था देखा अजीब बात है एक गोली ना लगने से दूसरा विश्व युद्ध हुआ और एक गोली लगने के कारण पहला विश्वयुद्ध शुरू हुआ इतिहास सदा है ऐसे ही बनता.

तो हमने आपको इस पोस्ट में बताया प्रथम विश्व युद्ध के बारे में प्रथम विश्वयुद्ध के बारे में हमने आपको बहुत सारी जानकारी दी और किस तरह प्रथम विश्वयुद्ध शुरू हुआ क्या क्या बदलाव थे प्रथम विश्व युद्ध शुरू होने के क्या कारण थे प्रथम विश्वयुद्ध के अंदर किन किन देशों को नुकसान हुआ इस तरह की कुछ रोचक जानकारी आपको बताइए यदि आपको यह पोस्ट पसंद आए तो शेयर करना ना भूलें और यदि आपका इसके बारे में कोई सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करके पूछ सकते हैं.

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1 Comment
  1. Virendra maravi says

    I am feathful

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