अश्वगंधा कब और किसे खाना चाहिए

अश्वगंधा कब और किसे खाना चाहिए

अश्व का मतलब होता है. घोड़ा तो कई लोग यह भी कहते हैं कि अश्वगंधा लेने से घोड़े जैसी ताकत आती है. यदि आप किसी भी औषधि को इस्तेमाल करते हैं तो आपको उसके प्रभाव और प्रकृति के बारे में पता होना चाहिए क्या वह गर्म है. या ठंडी है. तर है. कि खुश्क है. हल्की है. या भारी है. इन सब चीजों के बारे में यदि आपको नहीं पता है. तब तक आप कितने भी उसके नुस्खे बनाकर इस्तेमाल करते रहे आपका कोई फायदा नहीं होगा औषधि अच्छी तरह से तब काम करेगी जब उसे हम हमारे शरीर की आवश्यकता के अनुसार सही ढंग से उसका इस्तेमाल करे.

अश्वगंधा क्या है

अश्वगंधा का प्रभाव गर्म होता है. और यह गर्म होने के साथ-साथ यह खुश्क भी होता है. यानि गर्म खुश्क (Hot and Dry) अब आप सोच रहे होंगे कि अश्वगंधा तो गर्म है. यह हमारे शरीर में नुकसान कर सकता है. लेकिन कोई भी गर्म चीज हो उसका नुकसान तभी होगा जब आप उसका सही से इस्तेमाल नहीं करेंगे यदि आप इस्तेमाल सही करना सीख जाएंगे तो चाहे कोई भी गर्म चीज हो वह आपके शरीर को किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचा सकती.

अश्वगंधा की यदि हम बात करे तो इसका हमारे शरीर पर कुछ प्रतिशत तो प्रभाव पड़ता है. लेकिन वह आपके शरीर में कोई भी दुष्प्रभाव नहीं करेगा हालांकि एक बार शुरू शुरू में यह थोड़ी बहुत गर्मी दिखाएगा लेकिन आपको डरना नहीं है. उसे अच्छी तरह से इस्तेमाल करना सीखना है. और आप अच्छी तरह से उसका इस्तेमाल करना सीख जाएंगे तब यह आपके शरीर को कोई भी हानि नहीं पहुंचा सकता इसलिए इसे अच्छी तरह से इस्तेमाल करना सीखिए.

अश्वगंधा किन – किन रोगों में लाभ पहुंचता है

1. वात रोग

अश्वगंधा गर्म होने के कारण वात रोगों में बहुत काम आता है. यानी कि जो हवा के कारण समस्या होती है. जैसे – हवा के कारण कई बार जोड़ों में दर्द होने लगता है. , कई बार हमारे शरीर में जब हम खड़े होते हैं या फिर बैठते हैं या फिर लेटते हैं तो हमारे शरीर में कड़क – कड़क की आवाज आती है. और हवा के कारण ही गठिया भी हो जाता है. तो हवा के कारण होने वाले सभी समस्याओं में अश्वगंधा बहुत काम करता है.

2. कफ रोग

अश्वगंधा गर्म होने के साथ-साथ खुश्क भी है. तो यह कफ में भी काम आएगा क्योंकि कफ से संबंधित रोग ज्यादातर नमी वाले होते हैं जैसे कि साइनस, जुखाम, नजला , तो इन सभी रोगों के लिए अश्वगंधा बिल्कुल सही है.

अश्वगंधा किन – किन रोगों में हानियाँ पहुंचता है.

1. पित्त रोग

पित्त रोगी को गर्म से चीज नुकसान नहीं करती आप यह सोचते होगे की जिनके लिवर में गर्मी है. उनको गर्म चीज देने से उनको नुकसान हो सकता है. पपीता भी गर्म होता है. लेकिन जिनको लिवर में गर्मी होती है. वह रोगी पपीता खाते हैं क्योंकि पपीता खुश्क नहीं है. लेकिन अश्वगंधा गर्म तो है. साथ में खुश्क भी है. सौंफ भी गर्म होती है. लेकिन सौंफ खुश्क नहीं होती सौंफ तर होती है. इसलिए सौंफ एसिडिटी कम कर देती है. लेकिन अश्वगंधा पित्त रोग में खराबी इसलिए करता है. क्योंकि यह गर्म होने के साथ – साथ खुश्क भी है.
लेकिन पित्त रोगियों को भी अश्वगंधा देने की आवश्यकता पड़ सकती है. तो वह किस प्रकार से दी जा सकती है. इसीलिए आयुर्वेद में कई तरह से कुछ रोगियों को अश्वगंधा देने का विधान है.

तो यहां पर हम बात करेंगे अश्वगंधा के जड़ों के पाउडर के बारे में बात करेंगे कि उसे पानी के साथ किस तरीके से लिया जाता है. और जिस अश्वगंधा की जड़ में से बहुत ज्यादा गंध आती हो वही सबसे बढ़िया क्वालिटी का अश्वगंधा माना जाता है. वैसे तो अश्वगंधा सभी प्रकार का ही बढ़िया होता है. लेकिन अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग ताकत होती है. तो इसलिए कई अश्वगंधा में गंध नहीं भी आती है. लेकिन जो बढ़िया क्वालिटी का अश्वगंधा है. उसमें बहुत तेज गंध आती है.

अश्वगंधा को पानी में किस समस्या के कारण लिया जाता है

1. जब आपके घुटने या किसी भी प्रकार के जोड़ों में या कहीं पर भी दर्द हो रहा हो तब हल्की एक चम्मच गर्म पानी के साथ ले ले क्योंकि अश्वगंधा गर्म होता है. तो गरमाईस से दर्द खत्म हो जाता है.

2. जब आपको बहुत तेज खांसी जुखाम हो या कई लोगों को एलर्जी टाइप जुकाम भी होता है. तो कुछ हालात में भी आप अश्वगंधा को ले सकते हैं एक हल्की चम्मच गर्म पानी के साथ शाम को और एक हल्की चम्मच सुबह गर्म पानी के साथ लेने से आपकी खासी, जुखाम ठीक हो जाएगा

3. कई पुरुषो और औरतो को सेक्स से सम्बंधित रोग होते है. तो वो इसे गर्म दूध के साथ ले सकते है. कई लोगो को दूध पचता नहीं है. या दूध से अलर्जी है. या किसी और कारण से दूध नहीं लेते है. तो वे इसे थोड़े गर्म पानी में उबाल कर ले सकते है.

4. कई लोगों को अश्वगंधा सूट नहीं करता जिसके कारण होंठ फटने या खून आने लग जाते हैं या कोई और दिक्कत हो जाती है. तो वह इसे मिश्री के साथ बराबर मात्रा मिलाकर और दूध के साथ ले लेते है. तो उन्हें यह कोई दिक्कत नहीं करेगा और इसके साथ आप हरी इलाइची मिला सकते है. अगर आपको यह ज्यादा ठंडा बनाना है. तो

5. कई लोगों को दमे का रोग होता है. तो वह भी अश्वगंधा को ले सकते हैं क्योंकि दमा भी बात और कफ के रोगों के बिगड़ने से ही होता है. तो इसके लिए अश्वगंधा को उबाल उबाल कर काढ़ा बनाया जाता है. और उस उबलते हुए काटे में ही अपने हिसाब से शक्कर डाल सकते हैं और अपने हिसाब से थोड़ा देसी घी मिला सकते हैं और फिर गरम गरम उसका काडे को पिने से दमे के रोगी को आराम मिलता है.

कोई भी कुशल व्यक्ति जिसको आयुर्वेदिक औषधि के बारे में अच्छी तरह से जानकारी है. वह इसको अपनी बीमारी के हिसाब से Adjust कर सकते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है. कि कौन सी बीमारी के साथ मिश्री अच्छी रहेगी या शक्कर तो वह इसे अपने हिसाब से Adjust कर लेते है. कई लोगो को सुगर होती है. तो वह मीठा तो दूर गर्म पानी भी इस्तेमाल नहीं करते तो वह इसमें जितना अश्वगंधा लेते है. उसका एक चौथाई भाग गिलोय सत् का डाल कर अच्छी तरह मिलाकर ताजे पानी या दूध के साथ ले सकते है.

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